त्वरित लिंक्स
History of India
15 views
भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान और उसके पश्चात सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया, तब भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का नेतृत्व करने वाले नेताओं में अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन, राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण प्रमुख थे, जबकि जापान से रेडियो प्रसारण के माध्यम से सुभाष चंद्र बोस ने इस आंदोलन को नैतिक समर्थन प्रदान किया था।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार (अर-हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद) की स्थापना की और वे इसके प्रधानमंत्री तथा सेनापति बने; इस सरकार को जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ देशों ने मान्यता प्रदान की थी।
- 3. आज़ाद हिंद फौज (INA) की 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और 'नेहरू ब्रिगेड' के अतिरिक्त महिलाओं की एक विशेष रेजिमेंट का गठन किया गया था, जिसका नामकरण झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया था और इसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल के हाथों में थी।
- 4. वर्ष 1945 में लाल किले (Red Fort Trials) में INA के अधिकारियों (शाह नवाज खान, प्रेम सहगल और गुरदयाल सिंह ढिल्लों) पर चले मुकदमे के दौरान उनके बचाव पक्ष के मुख्य वकीलों की कानूनी रक्षा समिति के अध्यक्ष भूलाभाई దేశाई थे, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कात्जू भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अरुणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे युवा नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन किया। इसी बीच जर्मनी और बाद में जापान पहुँचे सुभाष चंद्र बोस ने 'आज़ाद हिंद रेडियो' से देशवासियों को संबोधित किया। सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' (अस्थায়ী स्वतंत्र भारत सरकार) की स्थापना की, जिसे धुरी राष्ट्रों ने मान्यता दी थी। INA में 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और 'नेहरू ब्रिगेड' के साथ-साथ महिलाओं की 'रानी झांसी रेजिमेंट' भी बनाई गई जिसकी कमान डॉ. लक्ष्मी स्वामीनाथन (कैप्टन लक्ष्मी सहगल) के पास थी। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात वर्ष 1945-46 में दिल्ली के लाल किले में INA के सिपाहियों पर चले मुकदमों में बचाव पक्ष की प्रसिद्ध वकीलों की टीम का नेतृत्व भूलाभाई देसाई ने किया था। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
बहलोल लोदी के शासन की मुख्य विशेषता क्या थी?
→
पंजाब के किस सूबेदार ने इब्राहिम लोदी से बदला लेने के लिए बाबर को निमंत्रण दिया था?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में ब्रिटिश सत्ता के पुनरुद्धार और विद्रोह के दमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों को कुचलने और विद्रोह का दमन करने के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल ने मुख्य रूप से अभियान का नेतृत्व किया था, जबकि मौलवी को अंततः पुवायाँ के राजा के सहयोग से अंग्रेजों द्वारा घेरकर मार दिया गया था।
2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक मजबूत समानांतर सरकार चलाई थी, किंतु अंततः सर कॉलिन कैंपबेल और ब्रिटिश सेना द्वारा बरेली पर पुनः अधिकार कर लिए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया।
3. इलाहाबाद में लियाकत अली ने विद्रोह का शानदार नेतृत्व करते हुए सरकारी खजाने पर अधिकार कर लिया था और मौलवी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी, किंतु कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद के विद्रोह को कुचल दिया और लियाकत अली को बाद में आजीवन अंडमान निष्कासित कर दिया गया।
4. इन तीनों ही केंद्रों (फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद) में विद्रोही ताकतों का दमन करने में असफल रहने के बाद ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग ने अंततः अवध के ताल्लुकदारों के साथ सुलह करने की नीति को पूरी तरह त्याग दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और अत्यधिक कर की दरों के कारण ग्रामीण किसान तबाह हुए, वहीं अंग्रेजों की मुक्त व्यापार नीति (Free Trade Policy) के परिणामस्वरूप भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिससे कारीगर वर्ग में तीव्र आर्थिक असंतोष उत्पन्न हुआ।
2. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी के साथ-साथ कुशासन के आधार पर अवध रियासत का भी ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया, जिससे अवध के सैनिकों और जनता में गहरी राजनीतिक नाराजगी फैली।
3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में उठाया गया कदम माना।
4. लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेना सेवा भर्ती अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया कि बंगाल सेना के नए रंगरूटों को आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) भी सेवा देने जाना होगा, जिसे उच्च वर्ण के सैनिकों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के पूर्णतः विरुद्ध माना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
लोदी काल के मकबरों को दो वर्गों में बाँटा गया है, अष्टकोणीय मकबरे किसके लिए होते थे?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.