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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वास्को डी गामा की 1498 में कालीकट की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान वहाँ के स्थानीय शासक 'जमूरीन' (सामुतिरी) ने पुर्तगालियों का स्वागत किया, क्योंकि कालीकट के अरब व्यापारियों ने पुर्तगाली व्यापारिक एकाधिकार का तुरंत समर्थन किया था।
- 2. भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय के रूप में फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) की शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करना और अरबी-मिस्र के व्यापारिक वर्चस्व को समाप्त करना था।
- 3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा पर अधिकार कर लिया और पुर्तगालियों को स्थानीय भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- 4. नुनिओ डी कुन्हा ने पुर्तगाली मुख्यालय को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया और 1534 में बेसिन तथा 1535 में दीव पर अधिकार कर उत्तर भारत के मुगलों के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि वास्को डी गामा के कालीकट पहुँचने पर स्थानीय शासक जमूरीन ने उनका स्वागत जरूर किया था, किंतु कालीकट के अरब व्यापारियों ने पुर्तगालियों के आगमन का तीव्र विरोध किया था क्योंकि वे हिंद महासागर के व्यापार पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते थे। शेष कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सही हैं। पुर्तगालियों के भारत में प्रशासनिक विस्तार और नीतियों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भक्ति और सूफी आंदोलन के वैचारिक विकास, संतों की दार्शनिक प्रणालियों तथा उनके प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत वेदांत के दर्शन के विपरीत, दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' मत का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और ब्रह्म पृथक होने के बावजूद अंततः ब्रह्म का ही एक अंश हैं और भक्ति ही मोक्ष का एकमात्र साधन है।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत बंधनों और ऊंच-नीच के भेदों को अस्वीकार करते हुए सभी जातियों के लोगों को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, जिनमें उनके प्रसिद्ध शिष्यों में रैदास (जूता बनाने वाले), सेना (नाई) और कबीर (जुलाहा) शामिल थे।
3. सूफी संतों की 'चिश्ती सिलसिला' (Chisti Order) की परंपरा में संगीत (जिसे 'समां' कहा जाता है) को ईश्वर प्राप्ति का माध्यम माना गया, और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर को अपना मुख्य केंद्र बनाकर भारत में इस सिलसिले की नींव रखी थी।
4. सूफी संतों की 'सुहरावर्दी सिलसिला' (Suhrawardy Order) के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण को अस्वीकार करने की कठोर नीति अपनाई और जीवनयापन के लिए भिक्षावृत्ति को अनिवार्य मानते हुए शाही जागीरों या आर्थिक अनुदानों को लेने से पूरी तरह इंकार कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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औरंगजेब के कितने पुत्र थे?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुख्य रूप से आलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों को जाता है, जिन्होंने अपनी रचनाओं में जाति-पाति के कठोर बंधनों की आलोचना की तथा तमिल भाषा को भक्ति के प्रचार का माध्यम बनाया, जिससे अलवर संत आंदाल को 'दक्षिण की मीरा' के रूप में जाना गया।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा), और सेना (नाई) जैसे समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मिलित किया, तथा उन्होंने संस्कृत के स्थान पर लोकभाषा (हिंदी/अवधी) को उपदेश का माध्यम बनाया।
3. सूफी मत (तसव्वुफ़) के चिश्ती सिलसिले की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबारों के साथ निकट संबंध और भारी मात्रा में जागीरें स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से पालन किया ताकि वे गरीबों की सेवा कर सकें।
4. महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में समकालीन सात सुल्तानों का शासनकाल देखा गया, किंतु उन्होंने कभी भी किसी सुल्तान के दरबार में प्रवेश नहीं किया और 'सुल्तान-उल-मशाइख' की उपाधि से विभूषित हुए, जबकि उनके प्रिय शिष्य अमीर खुसू ने फारसी कविता में भारतीय शैली (सबक-ए-हिन्दी) का सूत्रपात किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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