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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव, चालुक्य और चोल राजवंशों की प्रशासनिक, कलात्मक एवं सैन्य उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल में 'मत्तविलास प्रहसन' नामक संस्कृत नाटक की रचना की थी तथा महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकाश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण कार्य उसके ही काल में प्रारंभ हुआ था।
- 2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस विजय के उपरांत उसने 'परमेश्वर' तथा 'दक्षिणपथेश्वर' की उपाधियाँ धारण की थीं।
- 3. चोल सम्राट राजेंद्र प्रथम ने अपनी शक्तिशाली नौसेना के माध्यम से श्रीविजय साम्राज्य (सुमात्रा, जावा और मलय प्रायद्वीप) पर सफल सैन्य अभियान चलाया था, तथा गंगईकोंडचोलपुरम की नई राजधानी की स्थापना कर 'गंगईकोंडचोल' की उपाधि धारण की थी।
- 4. चोल प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी स्थानीय स्वशासन व्यवस्था थी, जिसका विस्तृत विवरण उत्तरामेरुर (Uttaramerur) अभिलेखों में मिलता है, जिसमें ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए लॉटरी (कुडावोलई पद्धति) प्रणाली का उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 2, 3 और 4 सही हैं, जबकि कथन 1 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकाश्म रथ मंदिरों का निर्माण महेंद्रवर्मन प्रथम के पुत्र और उत्तराधिकारी नरसिंहवर्मन प्रथम (मामल्ल) के काल में करवाया गया था, न कि महेंद्रवर्मन के काल में (यद्यपि महेंद्रवर्मन ने पाषाण-उत्कीर्ण मंदिर वास्तुकला की शुरुआत की थी)। पल्लव राजवंश के कला और इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय और चोल साम्राज्य की नौसैनिक तथा स्थानीय स्वशासन (उत्तरामेरुर अभिलेख) की विशेषताएँ बिल्कुल सही हैं।
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल और सम्राट अशोक के धम्म तथा अभिलेखीय साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य काल में केंद्रीय प्रशासन की देखरेख के लिए 'तीर्थ' नामक उच्च अधिकारियों की एक श्रेणी थी, जिनकी संख्या अठारह थी, और इनमें 'समहर्त्ता' आय के संग्रह और 'सान्निधाता' राजकोष एवं भण्डारगृह के प्रभारी होते थे।
2. अशोक के 'प्रस्तर अभिलेखों' में प्रयुक्त लिपियों में ब्राह्मी और खरोष्ठी के अतिरिक्त ग्रीक (यूनानी) और अरामाईक लिपियों का भी प्रयोग मिलता है, विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे कंधार और शहबाजगढ़ी के अभिलेख) में।
3. चंद्रगुप्त मौर्य के समय जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख से यह प्रमाणित होता है कि उनके प्रांतीय राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य ने सौराष्ट्र क्षेत्र में 'सुदर्शन झील' का निर्माण करवाया था, जिसका उल्लेख बाद के शक शासक रुद्रदामन के अभिलेख में भी मिलता है।
4. अशोक के धम्म की नीति केवल बौद्ध धर्म के धार्मिक सिद्धांतों का प्रचार करने तक सीमित थी, और इसके अंतर्गत उन्होंने अपने साम्राज्य में सभी प्रकार के पशु-बलि तथा मौज-मस्ती के उत्सवों पर पूर्ण और स्थायी प्रतिबंध लगा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल प्रशासन में मीर बख्शी:
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के प्रावधानों के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठक का यह प्रावधान किया गया था कि दोनों प्रांतों के हिन्दू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्य अलग-अलग बैठक करके यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Plebiscite) का प्रावधान किया गया था।
3. योजना के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच शक्तियों के हस्तांतरण तथा सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (पंजाब और बंगाल के लिए) का गठन किया गया था, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से पहले ही अपनी सीमा रिपोर्ट सौंप दी थी।
4. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 में यह स्पष्ट किया गया था कि 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया जाएगा और ब्रिटिश राजमुकुट का भारतीय रियासतों पर सर्वोच्च अधिकार समाप्त हो जाएगा, जिससे रियासतों को यह छूट मिल गई कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा स्वतंत्र रहें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश नीतियों में आए परिवर्तनों और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत के प्रशासन का नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से छीनकर सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया, तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय भारतीय परिषद को दे दिए गए।
2. ब्रिटिश भारत के प्रत्यक्ष प्रशासन के लिए 'वाइउसराय' (Viceroy) पद का सृजन किया गया, जो सीधे ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी था, और लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल होने के साथ-साथ पहले वाइउसराय भी बने।
3. 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के माध्यम से भारतीय रियाسतों को यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का क्षेत्रीय विस्तार किया जाएगा और राजाओं की दत्तक पुत्र लेने की प्रथा (Adoptive rights) को समाप्त किया जाता है।
4. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, नस्लीय भेदभाव को समाप्त कर योग्यता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सरकारी सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने तथा प्राचीन भारतीय सामाजिक एवं धार्मिक परंपराओं का पूर्ण सम्मान करने का वचन दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता के सुदृढ़ीकरण के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट जहाँगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को सूरत में एक स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान की थी, जिसके तहत अंग्रेजों को संपूर्ण मुगल साम्राज्य में बिना किसी कर के आंतरिक व्यापार करने का असीमित अधिकार मिल गया था।
2. वर्ष 1698 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूतासुती, कलकत्ता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारियों को खरीदकर फोर्ट विलियम के किलेबंदी की नींव रखी, जिसका प्रथम प्रेसिडेंट चार्ल्स आयर को बनाया गया था।
3. बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खान ने अपनी राजधानी को ढाका से स्थानांतरित कर मुर्शिदाबाद बनाया और अंग्रेजों द्वारा व्यापारिक विशेषाधिकारों (दस्तक) के दुरुपयोग पर कड़ा नियंत्रण लगाने का प्रयास किया, जिससे कंपनी और नवाब के बीच निरंतर तनाव बना रहा।
4. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश कंपनी को जारी किए गए ऐतिहासिक 'फरमान' के तहत कंपनी को बंगाल में 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बिना कर चुकाए व्यापार करने की विशेष छूट मिल गई, जिसे समकालीन इतिहासकार ओरम (Orme) ने कंपनी का 'मैग्नाकार्टा' कहा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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