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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष तथा रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वीर कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के बाद ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर के साथ बीबीगंज के पास हुए कड़े संघर्ष में पराजय के उपरांत गोरिल्ला युद्धनीति अपनाई और आजमगढ़ तक अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी।
- 2. ब्रिटिश सेना की गोली से कलाई के पास गंभीर रूप से घायल होने के बाद वीर कुंवर सिंह ने स्वयं अपनी तलवार से अपना बायाँ हाथ काटकर गंगा नदी में अर्पित कर दिया था।
- 3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को जारी रखते हुए ब्रिटिश शासन के समानांतर एक प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की थी।
- 4. अमर सिंह को ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के दौरान ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर बक्सर के किले में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार के जगदीशपुर के जमींदार बाबू वीर कुंवर सिंह ने अद्वितीय नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था। कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। वीर कुंवर सिंह ने मेजर विंसेंट आयर के विरुद्ध संघर्ष के बाद गोरिल्ला युद्ध अपनाकर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया, घायल होने पर स्वयं अपना हाथ काटा, और उनके निधन के बाद उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजों के खिलाफ समानांतर सरकार चलाई। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि अमर सिंह को युद्ध के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि नेपाल की तराई में संघर्ष के बाद उन्हें पकड़ा गया और कहा जाता है कि गोरखपुर जेल ले जाते समय रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई थी। इस ऐतिहासिक संघर्ष के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसका उपयोग कृषि उपकरणों, हथियारों तथा नगरों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता था, जिसे साहित्य में 'श्याम अयस' कहा गया है।
2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर अधिक कठोर हो गई, और इस काल में 'गोत्र' प्रथा की संस्थागत स्थापना हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ वह स्थान था जहाँ पूरे कुल का गोधन (मवेशी) एक साथ पाला जाता था।
3. ऋग्वैदिक काल में राजा की शक्ति निरंकुश नहीं थी, बल्कि उसे 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता था, जिनमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी होती थी।
4. वैदिक साहित्य में उल्लिखित 'नदीसूक्त' (ऋग्वेद के दसवें मंडल में) सिंधु और उसकी सहायक नदियों का उल्लेख करता है, जिसमें सरस्वती नदी को सबसे पवित्र नदी ('नदितम') माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया, जिससे पारंपरिक शासक वर्ग और उनके आश्रितों में गहरा राजनीतिक असंतोष फैल गया।
2. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के माध्यम से हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने वाले पुराने कानून को संशोधित किया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण के षड्यंत्र के रूप में देखा।
3. ब्रिटिश औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे दस्तकार और कारीगर बेरोजगार होकर कृषि पर आश्रित हो गए, जबकि भू-राजस्व की कठोर प्रणालियों ने किसानों को भारी कर्ज के जाल में फंसा दिया।
4. कंपनी द्वारा वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत भारतीय सैनिकों (सिपाहियों) के लिए समुद्र पार (विदेश) जाकर सेवा करना अनिवार्य कर दिया गया, जिसे तत्कालीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जाति और धर्म भ्रष्ट होने का मुख्य कारण माना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, भक्ति आंदोलन और सूफी सिलसिले के विभिन्न संतों तथा उनके दार्शनिक संप्रदायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य के 'अद्वैतवाद' के उत्तर में रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैतवाद' का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म (ईश्वर) से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी, तथा मोक्ष का मार्ग केवल 'ज्ञान योग' के माध्यम से ही संभव है।
2. मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' (Dualism) के दर्शन की स्थापना की, जिसके अनुसार ईश्वर (ब्रह्म) और आत्मा (जीव) पूरी तरह से पृथक् और स्वतंत्र सत्य हैं, तथा माया ईश्वर के नियंत्रण में रहने वाली एक वास्तविक शक्ति है।
3. सूफी संतों में 'चिश्ती सिलसिला' के संस्थापक ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती थे, जिन्होंने भारत में इस सिलसिले की नींव रखी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, राजकीय पदों तथा जागीरें स्वीकार करने की नीति का कड़ा विरोध किया था।
4. मध्यकालीन संत कबीर और नानक दोनों ने निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया और मूर्तिपूजा, जाति व्यवस्था, तीर्थयात्रा तथा बाह्य आडंबरों का पुरजोर खंडन किया, किंतु कबीर ने 'बीजक' में अपने उपदेश दर्ज किए जबकि नानक ने सिख पंथ की स्थापना के साथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में अपने विचार संकलित किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मलिक काफूर ने अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद लगभग कितने दिनों तक शासन का वास्तविक नियंत्रण अपने हाथ में रखा?
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हुमायूँ का जन्म कब हुआ?
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