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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34) और उससे जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता और भारत लौटने पर वायसराय लॉर्ड वेलिंगटन द्वारा कांग्रेस विरोधी नए अध्यादेशों और दमनकारी नीतियों को लागू किए जाने के कारण महात्मा गांधी ने जनवरी 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन को पुनः प्रारंभ कर दिया था।
  2. 2. ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा अगस्त 1932 में घोषित 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के तहत दलित वर्गों (अछूतों) को हिंदुओं से पृथक एक अलग निर्वाचक मंडल दिए जाने के विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच 'पूनम पैक्ट' (Poona Pact) संपन्न हुआ।
  3. 3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस दूसरे चरण के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बंगाल के मिदनापुर जिले में स्थापित 'ताम्र सरकार' सबसे लंबी समय तक चलने वाली और प्रमुख समानांतर सरकार थी।
  4. 4. कांग्रेस के भीतर बढ़ती निराशा और लगातार राजनीतिक दमन के बीच मई 1934 में पटना में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अधिवेशन में औपचारिक रूप से सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की विफलता और भारत लौटने पर महात्मा गांधी ने जनवरी 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया, जो 1934 तक चला। इस दौरान 'सांप्रदायिक पंचाट' के विरोध में गांधी जी ने पूना पैक्ट किया और मई 1934 में पटना में आंदोलन स्थगित किया गया। हालांकि, मिदनापुर की 'ताम्र सरकार' सविनय अवज्ञा के दौरान नहीं, बल्कि वर्ष 1942 के विकिपीडिया संदर्भ (Quit India Movement) के समय स्थापित हुई थी। अत: कथन 3 गलत है।
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