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History of India
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था और 'अर्थशास्त्र' में वर्णित विभिन्न संस्थागत प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य प्रशासन में सत्रह प्रमुख प्रशासनिक विभागों या अध्यक्षों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें 'तीर्थ' कहा जाता था, और इनमें सर्वोच्च अधिकारियों की नियुक्ति 'उपधा परीक्षण' (चरित्र परीक्षण) की कठोर पद्धति के माध्यम से की जाती थी।
  2. 2. मौर्य साम्राज्य की गुप्तचर प्रणाली अत्यंत उन्नत थी, जिसमें 'अर्थशास्त्र' में गुप्तचरों को 'संस्था' (एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले) और 'संचारा' (भ्रमण करने वाले) दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
  3. 3. प्रांतों (चक्रों) के प्रशासन का संचालन करने के लिए प्रायः शाही परिवार के राजकुमारों को 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' के रूप में नियुक्त किया जाता था, और प्रांतों का विभाजन आगे 'विषय' (जिले) में किया जाता था जिसका प्रमुख 'विषयपति' होता था।
  4. 4. अशोक के शिलालेखों में न्याय व्यवस्था का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसके तहत अशोक ने अपने राज्याभिषेक के छठे वर्ष ही 'रज्जुक' अधिकारियों को केवल राजस्व संग्रह करने का अधिकार दिया था, जबकि न्यायिक अधिकार पूरी तरह से राजा के पास सुरक्षित रखे गए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में मौर्य प्रशासन के केंद्रीय मंत्रियों को 'तीर्थ' कहा गया है जिनकी संख्या 18 थी और इनकी नियुक्ति से पूर्व 'उपधा परीक्षण' द्वारा उनके चरित्र की परीक्षा ली जाती थी। गुप्तचरों को 'संस्था' और 'संचारा' श्रेणियों में बांटा गया था। प्रांतों के प्रशासन हेतु 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' नियुक्त होते थे और प्रांत 'विषय' में विभाजित थे। कथन 4 असत्य है क्योंकि अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 12वें वर्ष 'रज्जुक' अधिकारियों को नियुक्त किया था जिन्हें पुरस्कार देने और दंड देने दोनों के न्यायिक अधिकार प्राप्त थे, न कि केवल राजस्व संग्रह करने के। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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