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History of India
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वर्धन राजवंश एवं पल्लव-चालुक्य संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हर्षवर्द्धन ने थानेश्वर से अपनी राजधानी कन्नौज स्थानांतरित की थी, और उसने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए कामरूप के राजा भास्करवर्मा के साथ मैत्री संबंध स्थापित किए थे, तथा वल्लभी के शासक ध्रुवसेन द्वितीय को अपनी पुत्री के विवाह के माध्यम से अपने प्रभाव क्षेत्र में मिलाया था।
- 2. नर्मदा नदी के तट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध में चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्द्धन की अजेय विजय यात्रा को रोक दिया था, जिसका प्रत्यक्ष विवरण पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी।
- 3. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम, जो पहले जैन धर्म का अनुयायी था, समकालीन शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म का उपासक बन गया और उसने त्रिचिरापल्ली में प्रसिद्ध रॉक-कट (चट्टान को काटकर बनाए गए) मंदिरों का निर्माण करवाया था।
- 4. कांची के पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल) ने वातापी (बादामी) पर आक्रमण कर चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोण्ड' की उपाधि धारण की, तथा महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों के निर्माण की शुरुआत की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। हर्षवर्द्धन ने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की थी और पुलकेशिन द्वितीय के साथ उसका नर्मदा नदी के तट पर संघर्ष हुआ था जिसकी जानकारी विकिपीडिया संदर्भ (ऐहोल अभिलेख) से मिलती है। इसके अतिरिक्त, महेंद्रवर्मन प्रथम और नरसिंहवर्मन प्रथम का काल पल्लव-चालुक्य संघर्ष और दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का स्वर्णकाल माना जाता है।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7th, 8th और 40th रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में शामिल होने के लिए आरा की ओर प्रस्थान किया।
3. छपरा (सारण) में विद्रोह का नेतृत्व मोहम्मद हुसैन खान ने किया था, जबकि मुजफ्फरपुर में सैनिकों के विद्रोह की सूचना मिलते ही यूरोपीय अधिकारियों ने भयभीत होकर अस्थायी रूप से शरण ली और स्थानीय जमींदारों के सहयोग से स्थिति को नियंत्रित किया।
4. बाबू कुंवर सिंह द्वारा जगदीशपुर में स्थापित हथियारों और गोला-बारूद के कारखाने को ब्रिटिश सेना द्वारा पूरी तरह से सुरक्षित छोड़ दिया गया था और विद्रोह के अंत तक उसे कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' (कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य) के विरुद्ध सफल संघर्ष किया गया था।
2. खेड़ा सत्याग्रह गुजरात के किसानों द्वारा फसल नष्ट होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा भू-राजस्व वसूले जाने के विरोध में किया गया था, जहाँ महात्मा गांधी के साथ-साथ सरदार वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने भी किसानों के इस आंदोलन का प्रमुखता से नेतृत्व किया था।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से ठीक पहले महात्मा गांधी ने भारत में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करते हुए वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में भाग लिया था, जहाँ उन्होंने औपचारिक रूप से असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव रखा था जिसे उसी समय कांग्रेस द्वारा स्वीकार कर लिया गया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही सरकार को यह झुककर निर्देश देना पड़ा कि केवल उन्हीं किसानों से राजस्व वसूला जाए जो स्वेच्छा से भुगतान करने में सक्षम हैं, तथा गरीब किसानों का लगान माफ कर दिया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक विकास तथा उनकी प्रमुख धाराओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रामानुजचार्य द्वारा प्रतिपादित 'विशिष्टअद्वैतवाद' के अनुसार ब्रह्म (ईश्वर) और जीव दोनों ही वास्तविक हैं, और जीव ब्रह्म का ही एक अंश है, जबकि शंकराचार्य का 'अद्वैतवाद' जगत को केवल एक माया और भ्रम मानता है।
2. सूफी मत के 'चिश्ती सिलसिले' की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य की राजनीतिक सत्ता तथा शाही दरबारों से दूरी बनाए रखने के साथ-साथ संगीत (समां) को ईश्वर-प्राप्ति का एक वैध माध्यम माना था।
3. बारहवीं सदी के वीरशैव (लिंगायत) आंदोलन के प्रवर्तक बसवन्ना थे, जिन्होंने ब्राह्मणवादी कर्मकांडों, जाति व्यवस्था और पुनर्जन्म के सिद्धांत का कड़ा विरोध किया तथा शिव की उपासना पर बल दिया।
4. मध्यकालीन संत कबीर और नानक दोनों ने ही निर्गुण भक्तिधारा का अनुसरण करते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद और बाह्य आडंबरों का खंडन किया, किंतु कबीर ने जहाँ नाथपंथियों के योगमार्ग को अपनाया, वहीं नानक ने पूरी तरह से सूफी दर्शन को ही अपना एकमात्र आधार बनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश पारंपरिक शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) अपने-अपने क्षेत्रीय हितों और रियायतों की पुनर्प्राप्ति तक ही सीमित थे, तथा उनके पास संपूर्ण भारत के लिए कोई स्पष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण, भविष्य का वैकल्पिक आर्थिक ढांचा या आधुनिक राष्ट्र-राज्य का खाका नहीं था।
2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, सैन्य अनुशासन और केंद्रीकृत कमान (Centralized Command) का भारी अभाव था, जबकि ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (टेलीग्राफ और रेलवे) तथा अनुभवी सेनापतियों का सुदृढ़ नेटवर्क था।
3. भारत के अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और बड़े जमींदारों ने आधुनिक सुधारों की आस और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के कारण इस विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया और इसे पूरे देश में फैलाने में ब्रिटिश शासन की मदद की।
4. दिल्ली पर कब्जा करने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा औपचारिक प्रतीक के रूप में सम्राट घोषित तो कर दिया गया था, किंतु विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय और सैन्य रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोही गतिविधियों और उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, तथा अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
2. बरेली में रोहिला प्रतिरोध का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने ब्रिटिश शासन के पतन के उपरांत अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु बरेली पर अंग्रेजों के पुनः अधिकार के पश्चात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी लियाकत अली ने ब्रिटिश सेना के दमन का डटकर मुकाबला किया, किंतु पराजय के बाद वे नेपाल की तराई में सुरक्षित निकल गए और ब्रिटिश रिकॉर्ड के अनुसार वहीं उनकी मृत्यु हो गई।
4. इलाहाबाद में जनरल नील द्वारा अत्यंत क्रूरतापूर्ण दमनकारी कार्रवाई की गई, जिसके तहत शहर में अंधाधुंध गिरफ्तारियां की गईं और सार्वजनिक रूप से फांसी तथा अन्य कठोर दंड देकर विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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