BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के नगर-नियोजन, जल-निकास प्रणाली और विशेष संरचनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगरों में 'ग्रिड प्रणाली' (Grid System) पर आधारित सड़क विन्यास पाया जाता था, जहाँ मुख्य सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर को आयताकार या वर्गाकार खंडों में विभाजित करती थीं।
  2. 2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) का उपयोग संभवतः किसी विशेष अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था, जिसकी उत्तर और दक्षिण दिशाओं में सीढ़ियाँ बनी थीं तथा इसके जल के रिساव को रोकने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था।
  3. 3. सिंधु सभ्यता के लगभग सभी घरों में व्यक्तिगत कुएँ, स्नानघर और उत्तम ढकी हुई नालियों की व्यवस्था थी, किंतु लोथल और चहुंदड़ो इसके अपवाद हैं जहाँ घरों में जल-निकास के लिए सोक-पिट (सोख्ता गड्ढे) या मृदभांड आधारित जल-मल निकास प्रणाली का उपयोग किया गया था।
  4. 4. कालीबंगा के लगभग सभी घरों और महत्वपूर्ण दीवारों के निर्माण में धूप में पकाई गई ईंटों (Sun-baked bricks) का व्यापक उपयोग किया गया था, जबकि समकालीन हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में भट्टी में पक्की ईंटों (Kiln-burnt bricks) का मुख्य रूप से प्रयोग हुआ था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के नगर अपनी उन्नत ग्रिड पद्धति और समकोण पर काटती सड़कों के लिए प्रसिद्ध थे। कथन 2 सही है क्योंकि मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार अनुष्ठानिक महत्व का था और जल रिसाव रोकने के लिए इसमें बिटुमिन का लेप था। कथन 3 गलत है क्योंकि लोथल में घरों में निजी जल-निकास या नालियों के बजाय सोक-पिट (सोख्ता गड्ढे) का अभाव देखा गया है और वहाँ जल प्रबंधन की अलग प्रणालियाँ थीं। कथन 4 सही है क्योंकि कालीबंगा में अधिकांशतः कच्ची ईंटों (धूप में पकाई गई ईंटों) का प्रयोग निर्माण कार्यों में किया गया था। सिन्धु घाटी सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

मराठों ने किस मुगल सम्राट के साथ 1752 ई. में रक्षात्मक संधि की थी, जिसके बदले उन्हें चौथ का अधिकार मिला? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल से बाहर इस आंदोलन के प्रसार, प्रमुख नेताओं की भूमिका तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में तथा अजीत सिंह और सैयद حیدر رضا ने उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था। 2. मद्रास प्रेसीडेंसी में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने और दक्षिण भारत में इसका मुखर प्रसार करने में वी. चिदंबरम पिलर (VO Chidambaram Pillai) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिन्होंने स्वदेशी नेविगेशन कंपनी की स्थापना कर ब्रिटिश शिपिंग कंपनी को कड़ी चुनौती दी थी। 3. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया था, किंतु गरमपंथी नेता बंगाल से बाहर इस आंदोलन के विस्तार और इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने को लेकर नरमपंथियों के साथ पूर्णतः सहमत नहीं थे। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की माँग को बल देते हुए कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना अगस्त 1906 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना था जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र नाथ बोस बने थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और इलाहाबाद दरबार में प्रस्तुत 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के प्रावधानों तथा प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रत्यक्ष शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (साम्राज्य) के अधीन कर दिया गया, जिसके साथ ही 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की पुरानी प्रणाली का अंत करके 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय राज्यों के विलय की अपनी विस्तारवादी नीतियों (जैसे व्यपगत सिद्धांत) को त्यागती है, देसी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकारों को मान्यता देती है और भविष्य में किसी भी नए क्षेत्र का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। 3. घोषणा पत्र में यह आश्वासन दिया गया कि भारत के लोगों के पारंपरिक सामाजिक और धार्मिक विश्वासों का पूर्ण सम्मान किया जाएगा, तथा सरकारी नौकरियों में प्रवेश और पदोन्नति के दौरान नस्ल, रंग या जन्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। 4. विद्रोह के दौरान अवध क्षेत्र के तालुकदारों और बड़े भूस्वामियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किए जाने के कारण, ब्रिटिश प्रशासन ने उनकी सभी भू-संपत्तियों को हमेशा के लिए जब्त कर लिया और उन्हें किसी भी प्रकार का कानूनी स्वामित्व वापस नहीं दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद, वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का प्रतीकात्मक सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। 2. वास्तविक सैन्य नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति दिल्ली में 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के पास थी, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों के दस निर्वाचित सैनिकों (छह इन्फैंट्री और चार कैवलरी से) की एक समिति शामिल थी। 3. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान लेफ्टिनेंट हडसन ने हुमायूं के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर लिया और उनके पुत्रों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 4. मुकदमे के दौरान बहादुर शाह जफर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार करते हुए अंग्रेजों के प्रति पूर्ण निष्ठा व्यक्त की और बर्मा (अब म्यांमार) भेजे जाने से पूर्व अंग्रेजों से अपनी पेंशन बढ़ाने की मांग की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों—चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के पश्चात महात्मा गांधी ने वर्ष 1915 में अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में अपने 'सत्याग्रह आश्रम' की स्थापना की थी, तथा गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने देश की राजनीतिक और सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए पूरे एक वर्ष तक देश का भ्रमण किया था। 2. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी बिहार गए थे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई क्रूर 'तीनकठिया पद्धति' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह किया था। 3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान पूरी तरह वसूलने के दमनकारी निर्णय के विरुद्ध किसानों का नेतृत्व किया, और इस आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल व इंदुलाल याग्निक जैसे युवा नेताओं ने गांधीजी का सक्रिय रूप से साथ दिया था। 4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान ही ब्रिटिश सरकार ने अंततः एक गुप्त आदेश जारी कर यह स्वीकार किया था कि लगान केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाए जो स्वेच्छा से भुगतान करने में समर्थ हैं, और यहीं पर गांधीजी ने पहली बार अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में 'असहयोग' (Non-Cooperation) के अस्त्र का औपचारिक प्रयोग किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.