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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के आगमन और पुर्तगाली-ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक 'जमूरिन' ने उसका स्वागत किया, जबकि कालीकट के तटीय व्यापार पर एकाधिकार जमाने वाले अरब व्यापारियों ने पुर्तगालियों के इस प्रवेश का कड़ा विरोध किया था।
- 2. पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क (Alfonso de Albuquerque) को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नौसेना का मुख्य केंद्र बनाया और क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ पुर्तगालियों को भारतीय स्त्रियों से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के समय मुगल सम्राट जहाँगीर ने कैप्टन विलियम हॉकिंस को 'अंग्रेज खान' की उपाधि से सम्मानित करते हुए सूरत में एक स्थायी कारखाना स्थापित करने की तुरंत शाही अनुमति प्रदान कर दी थी, जिससे पुर्तगालियों का प्रभाव तुरंत समाप्त हो गया था।
- 4. भारत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के शासनकाल में मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, और उन्होंने अपना पहला कारखाना 1668 में फ्रैंक कैरो के निर्देशन में सूरत में स्थापित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वास्को डी गामा 1498 में कालीकट पहुँचा था और जमूरिन ने उसका स्वागत किया था जबकि अरब व्यापारियों ने इसका विरोध किया था। कथन 2 सही है क्योंकि अल्बुकर्क को पुर्तगाली सत्ता का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में गोवा जीता और सामाजिक-धार्मिक सुधार के तहत कुछ नीतियां अपनाईं। कथन 3 गलत है क्योंकि जहाँगीर ने विलियम हॉकिंस को 1609 में सूरत में कारखाना खोलने की अनुमति तुरंत नहीं दी थी, क्योंकि पुर्तगालियों के दबाव के कारण शाही अनुमति मिलने में विलम्ब हुआ था और अंग्रेजों को पहली सफलता 1612 की स्वाली की लड़ाई के बाद मिली। कथन 4 सही है, फ्रांसीसी कंपनी की स्थापना 1664 में कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने बंबई अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया, तब महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का आह्वान किया था, किंतु इस आंदोलन के प्रारंभिक चरण में ही लगभग सभी शीर्ष कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह एक 'स्वतः स्फूर्त' (Spontaneous) और भूमिगत गतिविधियों पर आधारित जन-आंदोलन में परिवर्तित हो गया।
2. सुभाष चंद्र बोस ने 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के बाद फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की थी, और वर्ष 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी से छिपकर जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की तथा 'बर्लिन रेडियो' से नियमित रूप से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के पक्ष में प्रसारण किए।
3. सिंगापुर के पतन के पश्चात जापानी सेना द्वारा गिरफ्तार किए गए भारतीय सैनिकों को जापानी मेजर इवाइची फुजिवारा के सहयोग से कैप्टन मोहन सिंह ने 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) की पहली बटालियन के रूप में संगठित किया था, जिसका पुनर्गठन बाद में सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में 'सुभाष ब्रिगेड' और 'गांधी ब्रिगेड' के रूप में किया गया तथा इसी सेना के नियंत्रण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल काल में "पोलज":
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म की महायान शाखा और जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के बीच निम्नलिखित में से कौन सी एक मुख्य समानता या दार्शनिक समरूपता थी?
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आजाद हिंद फौज' (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक प्रस्ताव के बाद महात्मा गांधी ने 'करेंगे या मरेंगे' (Do or Die) का मंत्र दिया था, तथा इस आंदोलन की एक बड़ी विशिष्टता देश के कई हिस्सों में 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) का गठन था, जिसमें बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा की सरकारें प्रमुख थीं।
2. जापान के सहयोग से पुनर्गठित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का सर्वोच्च नेतृत्व ग्रहण करने के पश्चात, सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार) की स्थापना की थी, जिसे जापान सहित कुल नौ धुरी और मित्र राष्ट्र-समर्थक देशों ने आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी।
3. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से सिंगापुर रेडियो के माध्यम से 6 जुलाई 1944 को प्रसारित अपने एक संबोधन में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा था और भारत की पूर्ण मुक्ति के लिए उनके आशीर्वाद की कामना की थी।
4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर लाल किले (Red Fort Trials) में चलाए गए बहुचर्चित मुकदमों के दौरान ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बचाव पक्ष के वकीलों की मुख्य समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस ऐतिहासिक कानूनी दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रसिद्ध विधिवेत्ता भी सक्रिय रूप से शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास एक सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण और भविष्य के प्रशासनिक स्वरूप की कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं थी, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेता केवल अपने स्थानीय हितों और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा तक ही सीमित रहे।
2. नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह जैसे प्रमुख नेताओं ने अपनी रियासतों और खोए हुए अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के लिए नेतृत्व संभाला, किंतु उनमें अखिल भारतीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए कोई केंद्रीय और एकीकृत सैन्य कमान का अभाव था।
3. शिक्षित मध्यम वर्ग, आधुनिक बुद्धिजीवी और अधिकांश भारतीय रियासतों के शासकों ने इस विद्रोह का खुलकर समर्थन किया था, लेकिन ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक हथियारों और संचार साधनों के होने के कारण यह जनसमर्थन विद्रोह को सफलता दिलाने में विफल रहा।
4. विद्रोहियों के पास न तो पर्याप्त वित्तीय संसाधन थे और न ही कुशल सैन्य रसद प्रणाली, जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले संघर्षों के बीच किसी प्रकार का प्रभावी सामंजस्य नहीं बन पाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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