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History of India
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वैदिक साहित्य और उसके संकलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वेद के दो सबसे प्राचीन मंडल (द्वितीय और सप्तम मंडल) हैं, जिन्हें 'वंश मंडल' भी कहा जाता है क्योंकि इनकी रचना विभिन्न ऋषियों के वंशजों द्वारा की गई थी।
- 2. सामवेद में मुख्य रूप से यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों (स्तोत्रों) का संकलन है, और इसे भारतीय संगीत का जनक माना जाता है।
- 3. यजुर्वेद एक ऐसा वेद है जो गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है, और इसके दो प्रमुख भाग 'कृष्ण यजुर्वेद' और 'शुक्ल यजुर्वेद' हैं।
- 4. अथर्ववेद में जादू-टोना, वशीकरण, औषधियाँ और रोगों के निवारण से संबंधित मंत्रों का उल्लेख है, तथा इसमें वैदिक सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के सबसे प्राचीन मंडल द्वितीय से सप्तम मंडल हैं, जिन्हें 'वंश मंडल' या 'ऋषि मंडल' कहा जाता है क्योंकि ये पारंपरिक ऋषियों जैसे गृहत्समद, विश्वामित्र, वामदेव, अत्रि, भरद्वाज और वशिष्ठ से संबंधित हैं (प्रथम और दसवां मंडल सबसे अंत में जोड़े गए थे, अतः कथन 1 गलत है)। सामवेद यज्ञों के समय गाए जाने वाले मंत्रों का संग्रह है और इसमें भारतीय संगीत के सात स्वरों (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) का मूल मिलता है (कथन 2 सही है)। यजुर्वेद एकमात्र ऐसा वेद है जो गद्य एवं पद्य दोनों रूपों में उपलब्ध है और इसकी दो प्रमुख शाखाएं कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद हैं (कथन 3 सही है)। अथर्ववेद में लौकिक जीवन, औषधियाँ, तंत्र-मंत्र और राजनीति से जुड़े प्रसंग मिलते हैं, जिसमें सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है (कथन 4 सही है)। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगल काल में "हश्त-बिहिश्त" (Hasht-Bihisht) योजना का संबंध किससे था?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसकी कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोह का प्रसार संपूर्ण भारत में एक साथ और एक ही समय पर नहीं हुआ था, बल्कि यह मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत और पंजाब के अधिकांश भाग इस आंदोलन से तटस्थ या अप्रभावित रहे।
2. विद्रोही सैनिकों और विभिन्न क्षेत्रीय नेताओं के पास आधुनिक हथियारों, युद्ध सामग्री, कुशल सैन्य संगठन और एक केंद्रीय समन्वित राजनीतिक नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण वे ब्रिटिश साम्राज्य की अनुशासित और सुसज्जित सेना का दीर्घकालिक मुकाबला नहीं कर सके।
3. भारत के अधिकांश बड़े जमींदारों, साहूकारों, आधुनिक शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग और विभिन्न रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद, सिंधिया और नेपाल) ने विद्रोहियों का समर्थन करने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय सहयोग किया, जिससे विद्रोह को कुचलना अंग्रेजों के लिए आसान हो गया।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश शासन के स्थान पर एक स्पष्ट वैकल्पिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का कोई सुसंगत विजन या खाका नहीं था, और वे केवल पुरानी सामंतवादी व्यवस्था को बहाल करने तक ही सीमित रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया पद्धति' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 भाग पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना आवश्यक था।
2. राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर महात्मा गांधी जब चंपारण पहुँचे, तो स्थानीय ब्रिटिश प्रशासन ने उन पर जिला छोड़ने का आदेश दिया, जिसके अनुपालन से इनकार करने पर गांधी जी पर मुकदमा चलाया गया और अंततः सरकार को आदेश वापस लेना पड़ा।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान, फसल नष्ट हो जाने के कारण किसानों ने लगान माफी की मांग की, और इस आंदोलन के दौरान ही महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में भूख हड़ताल को अपने एक प्रमुख राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग किया था।
4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से प्रभावित होकर रबींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इसी आंदोलन के दौरान गांधी जी के साथ राजेंद्र प्रसाद, जे. बी. कृपलानी और महादेव देसाई जैसे नेता जुड़े थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक विकास, राजस्व सुधारों और सैन्य प्रबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा आरंभ की गई 'मनसबदारी प्रथा' में 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत स्तर, पद और वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले वास्तविक घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े और तीन घोड़े) की पदोन्नति व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने जात रैंक को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति मिल गई थी।
3. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत अकबर की 'दहशाला' प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर 'नासक' या 'कंकूट' प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे किसानों पर कर का बोझ कम हो गया और साम्राज्य की आय में भारी वृद्धि हुई।
4. औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के अंतर्गत वर्ष 1679 में पुनः 'जजिया कर' लागू किया गया, और इसके साथ ही उसने सम्राट के जन्मदिन पर वजन तौलने की पारंपरिक प्रथा 'तुलादान' तथा दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य तथा महात्मा गांधी की राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के विरुद्ध सविनय अवज्ञा के सफल प्रयोग के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (जैसे प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार) की नींव रखी, जिसे बाद में चंपारण कृषि अधिनियम, 1918 द्वारा कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया।
2. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध देशबंधु चित्तरंजन दास ने किया था, परंतु नागपुर के वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920) में उन्होंने ही स्वयं असहयोग आंदोलन के मुख्य प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे प्रस्तुत किया था।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए महात्मा गांधी ने चौरी-चौरा की घटना (फरवरी 1922) के बाद ही तुरंत राष्ट्रव्यापी स्तर पर 'कर न दो' (No-Tax) आंदोलन शुरू करने का निर्देश दे दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह (1918) के दौरान, जहाँ फसल नष्ट होने के कारण लगान माफी की मांग की गई थी, सरदार वल्लभभाई पटेल और गांधीजी के नेतृत्व में किसानों ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध दृढ़ संकल्प दिखाते हुए अपनी संपत्तियों की कुर्की के बावजूद लगान का भुगतान करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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