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History of India
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वीर कुंवर सिंह ने आरा और जगदीशपुर में विद्रोह की कमान संभालने के बाद ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाई तथा आजमगढ़ और बलिया क्षेत्र में अंग्रेजों को कड़ी चुनौती देते हुए गंगा नदी पार करने में सफलता प्राप्त की थी।
- 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास क्षेत्र) को अपना मुख्य केंद्र बनाकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक समानांतर सरकार और प्रभावी प्रतिरोध का संचालन किया था।
- 3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस लंबे संघर्ष को दबाने के लिए ब्रिटिश सेना को मेजर जनरल डगलस और कमिश्नर विलियम टेलर के नेतृत्व में भारी सैन्य अभियानों का सहारा लेना पड़ा था, तथा अमर सिंह को पकड़ने के बाद सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
- 4. जगदीशपुर में विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेनापति कैप्टन डनबर की संयुक्त सेना को बुरी तरह पराजित किया था, जिससे संपूर्ण बिहार और उत्तर प्रदेश के विद्रोही सैनिकों में भारी उत्साह का संचार हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में जगदीशपुर के जमींदार बाबू वीर कुंवर सिंह ने असाधारण साहस और सैन्य कौशल का परिचय दिया। उन्होंने आरा में अंग्रेजों को मात दी और आजमगढ़ तथा बलिया तक अपने सैन्य अभियानों का विस्तार किया। अप्रैल 1858 में उनकी मृत्यु के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष और गोरिल्ला युद्ध को लंबे समय तक जारी रखा। अमर सिंह को गिरफ्तार किए जाने के बाद ब्रिटिश कैद में ही उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी, उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी नहीं दी गई थी, जिससे कथन 3 असत्य है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1932 में जब सविनय अवज्ञा आंदोलन पुनः प्रारंभ हुआ, तब ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों के तहत 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' को गैर-कानूनी घोषित कर दिया और इसके सभी प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
2. लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932) में कांग्रेस ने भाग लिया था और इसमें महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में शिरकत की थी।
3. कम्युनल अवार्ड (सांप्रदायिक पंचांग) के तहत दलितों के लिए पृथक् निर्वाचन मंडल की घोषणा के विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था, जिसके परिणामस्वरूपी डॉ. बी.आर. अंबेडकर और गांधीजी के समर्थकों के बीच पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस दूसरे चरण में महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न स्थानीय समूहों ने भारी संख्या में भाग लिया, किंतु यह आंदोलन मई 1934 तक आते-आते पूरी तरह समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "वाकिया-नवीस" (Waqia-Navis) का मुख्य कार्य क्या था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली — जॉन निकलसन और हडसन
2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम
3. कानपुर — सर ह्यूरोज और नील
4. झांसी और ग्वालियर — मेजर जनरल सर ह्यूरोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की धार्मिक मान्यताओं, मातृदेवी की पूजा, मुहरों पर अंकित आकृतियों और पशु-पूजा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से प्राप्त मुहरों पर सबसे अधिक संख्या में एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन मिलता है, इसके अतिरिक्त कूबड़ वाले सांड, बाघ, गैंडा और हाथी के चित्र भी प्रचुर मात्रा में पाए गए हैं, लेकिन इस सभ्यता में कहीं भी गाय का अंकन मुहरों पर प्रमुखता से नहीं मिलता है।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक प्रसिद्ध मुहर पर योग मुद्रा में बैठे एक त्रिमूर्ति या त्रिमुख देवता का चित्र है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा विराजमान हैं तथा पैरों के पास दो हिरण बैठे हैं, जिन्हें जॉन मार्शल ने 'पशुपति महादेव' की संज्ञा दी थी।
3. सैंधव धर्म में मातृदेवी (Mother Goddess) की मृण्मूर्तियों की बहुलता से यह प्रमाणित होता है कि यह समाज पूर्ण रूप से मातृसत्तात्मक था, जहाँ पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति सर्वोच्च और राजनीतिक रूप से निर्णायक थी।
4. इस सभ्यता के लोग प्रकृति पूजक थे और वृक्षों (विशेषकर पीपल और बबूल) तथा नाग पूजा में विश्वास रखते थे, साथ ही लोथल और कालीबंगा जैसे स्थलों से अग्निकुंड या वेदियों के साक्ष्य मिलने से यह संकेत मिलता है कि वे अग्नि और यज्ञीय अनुष्ठानों से भी परिचित थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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