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History of India
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गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, प्रांतीय विभाजन तथा अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त साम्राज्य में प्रशासन की सबसे बड़ी प्रांतीय इकाई को 'भुक्ति' या 'देश' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपर्युक्त' या 'गोप्तृ' कहा जाता था और इनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा की जाती थी।
  2. 2. 'भुक्ति' के नीचे का प्रशासनिक प्रांतीय भाग 'विषय' (जिला) कहलाता था, जिसका प्रमुख अधिकारी 'विषयपति' होता था, और वह स्थानीय प्रशासन के संचालन के लिए नगर श्रेष्ठियों और व्यापारियों की एक परिषद (अधिकरण) के साथ कार्य करता था।
  3. 3. गुप्त प्रशासनिक शब्दावली में 'महादंडनायक' मुख्य न्यायाधीश या न्यायिक अधिकारी होता था, जबकि 'संधिविग्रहिक' युद्ध और शांति मामलों का सर्वोच्च मंत्री होता था, जो विदेश नीति का भी संचालन करता था।
  4. 4. गुप्त प्रशासन में 'कुमारामात्य' सबसे महत्वपूर्ण उच्च प्रशासनिक अधिकारी वर्ग था, और गुप्त सम्राटों के राजकुमारों को हीन पदों पर नियुक्त करने के लिए 'कुमार' की उपाधि दी जाती थी, जिनका प्रशासनिक कार्यों में कोई स्वतंत्र हस्तक्षेप नहीं था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था अत्यधिक विकेंद्रीकृत और सुव्यवस्थित थी। साम्राज्य की सबसे बड़ी प्रांतीय इकाई 'भुक्ति' या 'देश' थी, जिसके प्रशासक को 'उपरिक' (न कि उपर्युक्त) कहा जाता था। 'कुमारामात्य' गुप्त प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी वर्ग था, जिससे अधिकांश उच्च पदों (जैसे महादंडनायक, संधिप्रिग्रहिक आदि) के अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी, और राजकुमारों के साथ-साथ कई सामान्य कुलीन व्यक्तियों को भी इस पद पर नियुक्त किया जाता था, इसलिए कथन 4 गलत है। इस काल की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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