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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो पारंपरिक रूप से गाय का दूध निकालने का कार्य करती थी, तथा समाज पितृसत्तात्मक होने के बावजूद महिलाओं को उपनयन संस्कार का अधिकार था और वे वेदों की ऋचाओं की रचना भी करती थीं।
- 2. उत्तर वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'श्याम अयस' कहा गया है) ने कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिसके फलस्वरूप घुमक्कड़ जन या कबीले अब स्थायी जनपदों में परिवर्तित होने लगे और 'राष्ट्र' शब्द का पहली बार इसी काल में उल्लेख मिलता है।
- 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि से जुड़ी सभी प्रमुख क्रियाओं (जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई) के कर्मकांडीय अनुष्ठानों का विस्तृत विवरण मिलता है, और इसमें पत्नी को पति की 'अर्धांगिनी' कहा गया है जो धार्मिक अनुष्ठानों में उसकी सहगामी होती थी।
- 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत आने वाले 'वेदांगों' की कुल संख्या छह है, जिन्हें शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष के रूप में जाना जाता है, और इन्हें 'श्रुति' साहित्य का अभिन्न अंग माना जाता है क्योंकि इनकी रचना ऋषियों द्वारा सीधे ईश्वर से सुनी गई वाणी के रूप में हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ऋग्वैदिक काल में समाज पितृसत्तात्मक था, किंतु महिलाओं की स्थिति सम्मानित थी; उन्हें उपनयन संस्कार का अधिकार था और गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने ऋचाओं की रचना की थी। 'दुहितृ' शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय का दूध दुहने वाली पुत्री ही होता है। उत्तर वैदिक काल में 'श्याम अयस' (लोहा) के प्रयोग से कृषि में क्रांति आई और कबीले जनपदों में बदले, तथा 'राष्ट्र' शब्द का पहली बार उल्लेख इसी काल में मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में कृषि कर्मों और पत्नी को 'अर्धांगिनी' कहे जाने का उल्लेख है। कथन 4 गलत है क्योंकि वेदांग 'स्मृति' साहित्य के अंतर्गत आते हैं, न कि 'श्रुति' साहित्य के। विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की क्रांतिकारी गतिविधियों तथा ब्रिटिश सेना के साथ संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने 5 जून 1857 को कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाए।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया।
3. कानपुर में पराजय और ब्रिटिश सेना के पुनरधिकार के पश्चात तात्या टोपे ने अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
4. कानपुर में अंतिम पराजय के पश्चात नाना साहब अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष जारी रखने के बजाय जीवित अवस्था में ब्रिटिश सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और आजीवन नजरबंद रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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