त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 3 जून 1947 को घोषित 'माउंटबेटन योजना' (Mountbatten Plan) के तहत भारत के विभाजन को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया, जिसके अंतर्गत बंगाल और पंजाब की विधानसभाओं को अपनी-अपनी प्रांतीय विधानसभाओं के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान करने का अधिकार दिया गया था।
- 2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' (Indian Independence Act 1947) के प्रावधानों के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominions) में विभाजित कर दिया गया तथा ब्रिटिश क्राउन की 'भारत की सम्रागी' (Empress of India) की उपाधि समाप्त कर दी गई।
- 3. माउंटबेटन योजना के क्रियान्वयन और भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) ने अपना निर्णय 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही सार्वजनिक कर दिया था, जिससे दोनों नव-गठित देशों में शुरुआती सीमा विवाद पूरी तरह टल गए थे।
- 4. पंजाब और बंगाल के विभाजन के तौर-तरीकों का निर्धारण करने के लिए गठित सीमा आयोग में कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों के प्रतिनिधियों को समान रूप से न्यायिक अधिकार और वीटो पावर प्रदान की गई थी ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 और 2 पूरी तरह सही हैं। 3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत योजना के तहत भारत के विभाजन और सत्ता के हस्तांतरण की रूपरेखा तय की गई थी, जिसमें बंगाल और पंजाब के विभाजन पर प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्णय लिया जाना था। ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के माध्यम से 15 अगस्त 1947 को दो स्वतंत्र डोमिनियन राज्यों का सृजन किया गया और ब्रिटिश सम्राट की 'भारत की सम्रागी' उपाधि का अंत कर दिया गया। इसके विपरीत, कथन 3 असत्य है क्योंकि सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग ने अपनी रिपोर्ट (रेडक्लिफ रेखा) को 15 अगस्त 1947 के ठीक बाद 17 अगस्त 1947 को सार्वजनिक किया, जिसके कारण स्वतंत्रता के तुरंत बाद भारी हिंसा और सीमा संबंधी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई थी। कथन 4 भी असत्य है क्योंकि सीमा आयोग (Boundary Commission) में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के सदस्य केवल सलाहकार की भूमिका में थे, और आयोग के अध्यक्ष सर रेडक्लिफ के पास ही अंतिम निर्णय लेने की पूर्ण शक्ति थी।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया, जिसके कारतूस में गाय और सूअर की चरबी के प्रयोग की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों सार्जेंट ह्यूग बो और लेफ्टिनेंट बॉग पर हमला कर दिया था।
3. मंगल पांडे को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया और सैन्य अदालत (कोर्ट मार्शल) के आदेश पर 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही उन्हें फांसी दे दी गई।
4. बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे की शहादत के पश्चात 34वीं और 19वीं रेजीमेंट के सभी सैनिकों ने तुरंत अंग्रेजों के विरुद्ध संपूर्ण भारत में एक साथ सशस्त्र विद्रोह का औपचारिक बिगुल बजा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विजयनगर साम्राज्य में वह भूमि जो ब्राह्मणों को सामूहिक रूप से दान दी जाती थी, क्या कहलाती थी?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब (बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने संभाला, जिन्हें पेशवा घोषित किया गया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य कर रहे थे।
2. नाना साहब के सैनिकों ने कानपुर में सर ह्यू व्हीलर के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, किंतु 'सती चौरा घाट' की घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा बड़े पैमाने पर नरसंहार किए जाने के बाद नाना साहब और उनके सहयोगियों को अंग्रेजों के हाथों भारी पराजय का सामना करना पड़ा।
3. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सुरक्षा का कमान संभाला और ग्वालियर की विद्रोही सेना को अपने साथ मिलाकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने के लिए सर कॉलिन कैंपबेल की अंग्रेजी सेना के विरुद्ध भीषण संघर्ष किया।
4. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने नाना साहब के साथ नेपाल की तराई में शरण ले ली और आजीवन अंग्रेजों के हाथ नहीं आए, जबकि अजीमुल्ला खां को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व तथा उनकी रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने कानपुर की सेना के वास्तविक सैन्य कमांडर के रूप में अंग्रेजी सेना के खिलाफ उत्कृष्ट सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया और बाद में जनरल विंडहैन की ब्रिटिश सेना को कानपुर से खदेड़ने में सफलता प्राप्त की थी।
3. नाना साहब और उनके सहयोगियों द्वारा ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत कानपुर में 'बीबीघर हत्याकांड' (Bibighar Massacre) की घटना घटी, जिसके पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया था।
4. ब्रिटिश दमन चक्र के तीव्र होने पर नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि तात्या टोपे ने ग्वालियर और मध्य भारत की ओर प्रस्थान कर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध जारी रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुस्पासिह-अस्पासिह' (Du-aspa Sih-aspa) प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल सवार पद में बिना किसी वृद्धि के अतिरिक्त घोड़े रखने की अनुमति दी जाती थी।
2. शाहजहाँ ने मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली लागू की, जिसके अनुसार यदि किसी जागीर की आय मनसबदार के 12 महीनों के वेतन के बराबर नहीं होती थी, तो उसके वेतन में आनुपातिक कटौती कर दी जाती थी।
3. औरंगजेब के शासनकाल में जागीरदारी संकट (Jagirdari Crisis) के कारण जागीरों की कमी हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए उसने 'मशरुत' (Conditional) मनसबदारी व्यवस्था को समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.