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History of India
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक संप्रदायों, उनके प्रमुख आचार्यों तथा उनके वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी (अंश के रूप में), तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए 'प्रपत्ति' (पूर्ण आत्मसमर्पण) मार्ग पर विशेष बल दिया गया।
- 2. मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'द्वैतवाद' दर्शन के अनुसार ईश्वर, आत्मा और जड़ जगत पूरी तरह से पृथक और स्वतंत्र सत्य हैं, तथा ईश्वर और जीव के बीच कभी भी पूर्ण तदाकारिता या अद्वैत संबंध संभव नहीं है।
- 3. वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित 'शुद्धैतवाद' दर्शन के अनुसार माया का आवरण जीव पर नहीं बल्कि केवल ब्रह्म पर पड़ता है, जिसके कारण ब्रह्म अपनी इच्छा से संसार के रूप में प्रकट होता है और पुष्टि मार्ग के माध्यम से भगवान कृष्ण की अनन्य भक्ति ही मुक्ति का एकमात्र साधन है।
- 4. सूफी संतों के 'सुहरावर्दी' सिलसिले ने भारत में कठोर तपस्या, एकांत जीवन और राजकीय अनुदानों व जागीरों के पूर्ण बहिष्कार की नीति को अपनाया, जबकि इसके विपरीत 'चिशती' सिलसिले के संतों ने शाही दरबारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे और सुल्तानों से बड़े पैमाने पर भूमि-अनुदान स्वीकार किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: रामानुजचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसमें जीव और जगत को ब्रह्म का ही अंश माना गया है और भक्ति के साथ 'प्रपत्ति' (शरणागति) पर जोर दिया गया है। कथन 2 सही है: मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' (Dualism) का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार ईश्वर और जीव सर्वदा भिन्न हैं। कथन 3 गलत है: वल्लभाचार्य के 'शुद्धैतवाद' के अनुसार माया का आवरण जीव पर पड़ता है, ब्रह्म पर नहीं। कथन 4 गलत है क्योंकि यह चिशती और सुहरावर्दीसिलसिलों की नीतियों के विपरीत है; भारत में चिशती संतों ने राजकीय अनुदान और शाही दरबारों से दूरी बनाए रखी, जबकि सुहरावर्दी संतों ने शाही संरक्षण और जागीरों को स्वीकार किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक दृष्टिकोण था और न ही भविष्य के आधुनिक प्रशासनिक व सामाजिक ढांचे का कोई स्पष्ट वैकल्पिक खाका, जिसके कारण यह विशुद्ध रूप से सत्ता के विकेंद्रीकृत और पारंपरिक ताकतों का संघर्ष बनकर रह गया।
2. यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया था, किंतु विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों (जैसे झाँसी, कानपुर, लखनऊ और आरा) के विद्रोही नेताओं के बीच किसी भी प्रकार के केंद्रीय समन्वय, दीर्घकालिक सैन्य योजना और रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था।
3. अधिकांश आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, पश्चिम-शिक्षित बुद्धिजीवियों तथा अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, सिंधिया, होलकर और नेपाल के राणा) ने ब्रिटिश सत्ता के साथ निष्ठा बनाए रखी और विद्रोहियों के दमन में अंग्रेजों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सहायता प्रदान की।
4. विद्रोह का भौगोलिक और सामाजिक प्रसार मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तथा पारंपरिक सैनिकों तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत, पंजाब और पश्चिमी भारत का अधिकांश भाग या तो शांत रहा या अंग्रेजों के प्रति वफादार बना रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर के आदेश पर रामायण और महाभारत का फारसी में अनुवाद किस नाम से किया गया?
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मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणाली और शिवाजी के शासनकाल (स्वराज) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी के अष्टप्रधान में 'अमात्य' या 'मजूमदार' राज्य की आय-व्यय और संपूर्ण वित्त विभाग की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि 'सुमंत' या 'दबीर' विदेश मंत्री के रूप में विदेशी मामलों और राजा के दरबार की औपचारिक बैठकों का संचालन करता था।
2. शिवाजी ने अपने भू-राजस्व निर्धारण में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था का अनुसरण करते हुए शुरुआत में कुल उपज का 33 प्रतिशत भाग कर के रूप में तय किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया तथा 'कठी' (मापने की छड़ी) के माध्यम से भूमि की पैमाइश करवाई गई।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के बाह्य प्रांतों से वसूले जाने वाले कर थे, जिनमें चौथ पड़ोसी मुगल या अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा का आश्वासन देकर वसूला जाने वाला कुल राजस्व का एक-चौथाई भाग था, जबकि सरदेशमुखी मराठा वंश के वंशानुगत देशमुखी अधिकारों के दावे के रूप में कुल राजस्व का 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में 'पगा' घुड़सवार सेना नियमित और राज्य द्वारा सीधे सुसज्जित एवं वेतन पाने वाली सबसे अनुशासित सेना थी, जबकि 'सिलहदार' वे घुड़सवार सैनिक होते थे जो अपने घोड़े और अस्त्र-शस्त्र स्वयं लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब (बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने संभाला, जिन्हें पेशवा घोषित किया गया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य कर रहे थे।
2. नाना साहब के सैनिकों ने कानपुर में सर ह्यू व्हीलर के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, किंतु 'सती चौरा घाट' की घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा बड़े पैमाने पर नरसंहार किए जाने के बाद नाना साहब और उनके सहयोगियों को अंग्रेजों के हाथों भारी पराजय का सामना करना पड़ा।
3. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सुरक्षा का कमान संभाला और ग्वालियर की विद्रोही सेना को अपने साथ मिलाकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने के लिए सर कॉलिन कैंपबेल की अंग्रेजी सेना के विरुद्ध भीषण संघर्ष किया।
4. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने नाना साहब के साथ नेपाल की तराई में शरण ले ली और आजीवन अंग्रेजों के हाथ नहीं आए, जबकि अजीमुल्ला खां को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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