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History of India
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित धार्मिक एवं सामाजिक सुधार संगठनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. सत्यशोधक समाज - ज्योतिराव फुले
- 2. देव समाज - शिवनारायण अग्निहोत्री
- 3. सेवा सदन - पंडिता रमाबाई
- 4.
भारत सेवक समाज (Servants of India Society) - गोपाल कृष्ण गोखले उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना 24 सितंबर 1873 को ज्योतिराव फुले द्वारा महाराष्ट्र में शूद्रों और अति-शूद्रों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए की गई थी। युग्म 2 सही है क्योंकि 'देव समाज' की स्थापना 1887 में लाहौर में शिवनारायण अग्निहोत्री द्वारा की गई थी। युग्म 3 गलत है क्योंकि 'सेवा सदन' की स्थापना मुंबई में वर्ष 1915 में रमाबाई रानाडे और श्रीमती सुब्बराव द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए की गई थी, जबकि पंडिता रमाबाई ने 'आर्य महिला समाज' की स्थापना की थी। युग्म 4 सही है क्योंकि 'भारत सेवक समाज' (Servants of India Society) की स्थापना गोपाल कृष्ण गोखले ने वर्ष 1905 में पुणे में देश की सेवा के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने हेतु की थी। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अकबर के काल में "चाचर" भूमि किसे कहा जाता था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7th, 8th और 40th रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में शामिल होने के लिए आरा की ओर प्रस्थान किया।
3. छपरा (सारण) में विद्रोह का नेतृत्व मोहम्मद हुसैन खान ने किया था, जबकि मुजफ्फरपुर में सैनिकों के विद्रोह की सूचना मिलते ही यूरोपीय अधिकारियों ने भयभीत होकर अस्थायी रूप से शरण ली और स्थानीय जमींदारों के सहयोग से स्थिति को नियंत्रित किया।
4. बाबू कुंवर सिंह द्वारा जगदीशपुर में स्थापित हथियारों और गोला-बारूद के कारखाने को ब्रिटिश सेना द्वारा पूरी तरह से सुरक्षित छोड़ दिया गया था और विद्रोह के अंत तक उसे कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और उससे जुड़े क्रांतिकारियों के क्रियाकलापों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) किया गया, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा तैयार किया गया समाजवादी घोषणापत्र 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' इसका वैचारिक आधार बना।
2. ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स (Saunders) की हत्या (लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेने हेतु) के पश्चात भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंके, जिसका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहरों को अपनी आवाज सुनाना' और अपनी गिरफ्तारी देकर अदालत को अपने विचारों के प्रचार का मंच बनाना था।
3. लाहौर षड्यंत्र केस के मुकदमे के दौरान जेल में राजनीतिक बंधुओं के रूप में भारतीय कैदियों और यूरोपीय कैदियों के बीच हो रहे अमानवीय भेदभाव (जैसे बेहतर भोजन, कपड़े और स्वच्छता का अभाव) के विरोध में भगत सिंह और यतीन्द्र नाथ दास ने एक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की, जिसके दौरान 64 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद जतीन्द्र नाथ दास का शहादत हो गई।
4. चंद्रशेखर आजाद ने HSRA के मुख्य कमांडर के रूप में गुप्त रहकर क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया और 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद) में पुलिस के साथ हुई अंतिम मुठभेड़ में अंग्रेजों के हाथ आने के बजाय स्वयं को गोली मारकर वीरगति को प्राप्त हुए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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औरंगजेब के समय में किस हिंदू राजा ने "शिवाजी महाराज" और मुगलों के बीच "पुरंदर की संधि" करवाई थी?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के संचालन और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपनाई गई रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के लिए सैनिकों को संगठित किया।
2. नाना साहब के मुख्य सैन्य कमांडर तात्या टोपे ने गुरिल्ला युद्ध पद्धति का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कानपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना को भारी चुनौती दी तथा बाद में ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों का मुकाबला किया।
3. अजीमुल्ला खाँ, जो नाना साहब के प्रमुख सलाहकार और सचिव थे, ने विद्रोह के दौरान कूटनीतिक और राजनीतिक संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा वे लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी भी कर चुके थे।
4. कानपुर में विद्रोह के दमन के पश्चात नाना साहब अंग्रेजों के हाथों पकड़े गए और उन्हें सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई, जबकि तात्या टोपे और अजीमुल्ला खाँ नेपाल की तराई में सुरक्षित निकल जाने में सफल रहे और उनका कभी पता नहीं चल सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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