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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक-आर्थिक संरचना और पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चान्हूदरो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के दुर्ग (Citadel) के अवशेष नहीं मिले हैं, और यह स्थल विशेष रूप से मनके बनाने, शंख की कटाई और मुहर निर्माण जैसे शिल्प उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र था।
- 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य से यह सिद्ध होता है कि हड़प्पावासी फारसी खाड़ी और मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार करते थे, तथा यहाँ से मिले चावल के भूसी (Rice husk) के अवशेष भारत में धान की खेती के सबसे शुरुआती प्रमाणों में से एक हैं।
- 3. बनावली से प्राप्त मिट्टी का बना हल (Terracotta Plough) और कालीबंगा से मिले जुते हुए खेतों (Ploughed fields) के साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि सिंधु सभ्यता के लोग कृषि के लिए लकड़ी और पकी हुई मिट्टी के हलों के साथ-साथ उन्नत सिंचाई तकनीकों से भी परिचित थे।
- 4. हड़प्पा सभ्यता की लिपि 'चित्रात्मक' (Pictographic) है, जिसे अभी तक पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है, और यह लिपि सामान्यतः दाईं से बाईं ओर (Right to Left) लिखी जाती थी जिसे 'बौस्ट्रोफेडन' (Boustrophedon) शैली भी कहा जाता है जब यह एक पंक्ति दाईं से बाईं और अगली पंक्ति बाएं से दाईं ओर लिखी जाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। चान्हूदरो एक ऐसा पुरास्थल है जो बिना दुर्ग के था और शिल्प गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। लोथल का गोदीबाड़ा और चावल के साक्ष्य समुद्री व्यापार तथा कृषि अर्थव्यवस्था को प्रमाणित करते हैं। बनावली से टेराकोटा हल और कालीबंगा से जुते हुए खेत मिले हैं। किंतु कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि हड़प्पा लिपि को अधिकांशतः दाईं से बाईं ओर (Right to Left) लिखा जाता था, और जब यह सर्पिल रूप में दोनों तरफ से लिखी जाती है तब उसे 'बौस्ट्रोफेडन' कहा जाता है, लेकिन सिंधु लिपि के अधिकांश मुहरों और अभिलेखों में द्वि-दिशात्मक बौस्ट्रोफेडन शैली के स्पष्ट और सार्वभौमिक साक्ष्य नहीं मिलते हैं। हड़प्पा सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में, जहाँ फसल खराब हो जाने के कारण किसानों ने लगान माफी की मांग की थी, महात्मा गांधी ने नेतृत्व संभाला और इंदुलाल याग्निक, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे युवा नेताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का निर्देश दिया जो इसे चुकाने में सक्षम थे।
3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के पश्चात महात्मा गांधी ने बारोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और ब्रिटिश सरकार द्वारा दमनकारी नीतियां वापस न लिए जाने के कारण असहयोग आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर और अधिक तीव्र करने की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के वैचारिक व ऐतिहासिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब मुख्यधारा के अधिकांश वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जेल में बंद थे, तब भूमिगत (Underground) नेटवर्क का संचालन करने वाले समाजवादी नेताओं—जैसे जयप्रकाश नारायण, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली और राममनोहर लोहिया—ने सशस्त्र प्रतिरोध और तोड़फोड़ की गतिविधियों को संगठित किया था।
2. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में वर्ष 1943 में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना करने के उपरांत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त किया और उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' तथा 'स्वराज द्वीप' रखा था।
3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का नारा दिया था, और इसी दौरान सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से रेडियो प्रसारण के माध्यम से गांधी जी को आधिकारिक रूप से सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) संबोधित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष तथा बेगम हजरत महल एवं मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी।
3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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शेरशाह सूरी के समय "मुंसिफ-ए-मुंसिफान" का क्या कार्य था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीयकृत उच्च कमान (Centralized High Command) था और न ही कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक व सैन्य रणनीति; विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं ने मुख्य रूप से अपने स्थानीय और क्षेत्रीय हितों व अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों जैसे टेलीग्राफ और तीव्र रेल परिवहन का निर्णायक लाभ था, जबकि विद्रोहियों के पास सैनिक अनुशासन, आधुनिक हथियारों और गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था का पूर्ण अभाव था।
3. भारत के अधिकांश बड़े देसी रियासतें (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल के शासक) तथा शिक्षित मध्यम वर्ग व व्यापारी वर्ग या तो तटस्थ रहे या उन्होंने अंग्रेजों का सक्रिय रूप से समर्थन किया, जिससे विद्रोह अखिल भारतीय जन-आंदोलन का रूप नहीं ले सका।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद उनके पास विशाल सैन्य संसाधन और अत्याधुनिक तोपखाने उपलब्ध थे, जिनकी सहायता से उन्होंने अंग्रेजों को दिल्ली से खदेड़ दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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