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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' का मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना और सामाजिक-धार्मिक कुप्रथाओं का विरोध करना था।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने वेदों की अचूकता और अपौरुषेयता को स्वीकार किया, किंतु साथ ही मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बहुदेववाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
- 3. केशव चंद्र सेन के प्रयासों से 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा दिया, तथा इसके संस्थापकों में आत्माराम पांडुरंग मुख्य रूप से शामिल थे।
- 4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय ने 1815 में आत्मीय सभा की स्थापना की थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना कर 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और रूढ़ियों का खंडन किया। प्रार्थना समाज और सत्यशोधक समाज ने भी भारतीय समाज में व्याप्त असमानता के विरुद्ध क्रांतिकारी कार्य किए। इस ऐतिहासिक कालखंड के विषय में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली की पुनः प्राप्ति के उपरांत, मेजर विलियम हडसन ने हुमायूं के मकबरे के पास छिपे मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया था और उनके बेटों की हत्या कर दी थी।
2. विद्रोही सिपाहियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए सैनिकों ने मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, किंतु भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित कर दिया था, जिससे इस विद्रोह को अखिल भारतीय प्रतीकात्मक वैधता मिली।
3. बहादुर शाह जफर ने एक सक्रिय और कुशल सैन्य रणनीतिकार के रूप में पूरी दिल्ली की रक्षा का कमान अपने हाथों में संभाला था तथा ब्रिटिश सेनापति जॉन निकोलसन के विरुद्ध खुद रणक्षेत्र में मोर्चे का नेतृत्व किया था।
4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें निर्वासित कर बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के रंगून भेज दिया गया, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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किस विद्वान ने मोहम्मद बिन तुगलक को "दुनिया का खान" कहा था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक जन-विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम के एक ब्रिटिश अधिकारी डॉ. लॉयल की हत्या कर दी गई थी।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे सोन नदी पार करके सीधे शाहाबाद जिले में प्रवेश कर गए थे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों को स्थानीय जनता और विद्रोही सैनिकों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही सैनिकों ने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी।
4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के तुरंत बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को समाप्त करते हुए ब्रिटिश सत्ता के समक्ष पूर्ण समर्पण कर दिया था और कभीजंग जारी नहीं रखी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के आर्थिक कारणों और ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से विखंडित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप कृषक वर्ग भारी कर्ज के जाल में फंस गया और महाजनों तथा साहूकारों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया।
2. ब्रिटेन से सस्ते मशीनी कपड़ों और औद्योगिक वस्तुओं के भारी आयात ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे लाखों कारीगर और बुनकर बेरोजगार होकर कृषि पर आश्रित होने के लिए विवश हो गए।
3. ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा अपनाई गई मुक्त व्यापार नीति और एकतरफा शुल्क व्यवस्था (Free Trade Policy) के कारण पारंपरिक भारतीय विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात ब्रिटिश बाजारों में पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हो गया, जिससे भारतीय व्यापारिक हितों को ऐतिहासिक लाभ प्राप्त हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा के 1498 में कालीकट पहुँचने के उपरांत पुर्तगालियों ने भारत में अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का अनुसरण किया, जिसे मुख्य रूप से फ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा लागू किया गया था।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाلی साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया और क्षेत्र में सती प्रथा को प्रतिबंधित करने जैसे सामाजिक सुधार किए।
3. नुनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर बनने के बाद 1530 में अपनी आधिकारिक राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित करके गोवा बनाया, तथा गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से बेसिन और दीव जैसे महत्वपूर्ण भू-भागों पर अधिकार प्राप्त किया।
4. पुर्तगालियों ने भारतीय समुद्रों पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए 'कार्टेज' (Cartaz) नामक व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली की शुरुआत की थी, जिसके तहत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाए बिना अरब सागर और हिंद महासागर में स्वतंत्र रूप से व्यापार करने की पूर्ण छूट प्राप्त थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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