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History of India
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मुगलकालीन वास्तुकला और उसके विशिष्ट लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हुमायूं का मकबरा भारत में पहली बार चारबाग शैली का पूर्ण प्रयोग और सफेद संगमरमर से निर्मित विशाल दोहरे गुंबद (Double Dome) वाला पहला मकबरा था, जिसका निर्माण उसकी विधवा हाजी बेगम की देखरेख में फारसी वास्तुकार मिर्जा गियास द्वारा किया गया था।
- 2. शाहजहां के शासनकाल को मुगल वास्तुकला का 'स्वर्णकाल' कहा जाता है, जिसके दौरान लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर शुद्ध सफेद संगमरमर का अत्यधिक प्रयोग शुरू हुआ, तथा वास्तुकला में 'पित्रा दूरा' (Pietra Dura - संगमरमर पर मूल्यवान रत्नों की जड़ाई कला) का उत्कृष्ट प्रदर्शन ताजमहल और आगरा के दीवान-ए-आम में देखने को मिलता है।
- 3. जहांगीर के काल में वास्तुकला में मकबरों के निर्माण से अधिक सुंदर उद्यानों और कलात्मक अलंकरणों को प्राथमिकता मिली, जिसका सबसे सुंदर उदाहरण लाहौर का शालीमार बाग और नूरजहां द्वारा अपने पिता इत्माद-उद-दौला का संगमरमर से निर्मित मकबरा है, जो पूरी तरह पित्रा दूरा शैली से सुसज्जित है।
- 4. औरंगजेब के शासनकाल में विलासितापूर्ण वास्तुकला को राजकीय प्रोत्साहन मिलना बंद हो गया, किंतु उसकी अपनी पत्नी राबिया-उद-दौरानी (दिलरस बानो बेगम) की स्मृति में औरंगाबाद में निर्मित 'बीबी का मकबरा' (जिसे 'दक्खिन का ताज' भी कहा जाता है) ताजमहल की नकल के रूप में संगमरमर और प्लास्टर दोनों के मिश्रण से बनवाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि हुमायूं के मकबरे का मुख्य वास्तुकार मीर मिर्जा गियास (फारसी) था और यह भारत में पहला ऐसा मकबरा है जिसमें लाल बलुआ पत्थर के साथ संगमरमर का व्यापक उपयोग और दोहरे गुंबद (Double Dome) की वास्तुकला का प्रयोग किया गया, किंतु यह पूरी तरह सफेद संगमरमर से निर्मित नहीं था (मुख्यतः लाल बलुआ पत्थर से बना है)। इसके अलावा अन्य सभी कथन सही हैं। शाहजहां के काल में पित्रा दूरा कला का चरमोत्कर्ष देखा गया, जहांगीर के काल में इत्माद-उद-दौला का मकबरा पूरी तरह पित्रा दूरा से युक्त पहला संगमरमर का मकबरा बना, और औरंगजेब के काल में औरंगाबाद में बीबी का मकबरा बनाया गया। विकिपीडिया संदर्भ
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ की रेजिडेंसी पर जब ब्रिटिश सेना ने घेरा डाला, तब बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और विद्रोहियों को संगठિત करने में मुख्य भूमिका निभाई।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'फैजाबाद का डंका शाह' (लाइटहाउस ऑफ रिवोल्यूशन) के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना के कमांडर हेनरी लॉरेंस को करारी शिकस्त दी थी।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश शासन की क्षमादान की पेशकश को अस्वीकार करते हुए अंततः नेपाल की तराई में शरण ली, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की बढ़ती लोकप्रियता और सैन्य क्षमताओं से भयभीत होकर अंग्रेजों ने उन पर पचास हजार रुपये का इनाम रखा था, और अंततः पुव्वयाँ के राजा जगन्नाथ सिंह के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन और ब्रिटिश सेना द्वारा उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और अंग्रेजों ने उन्हें जीवित या मृत पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था।
2. बरेली में रोहिलखंड के विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश सेना द्वारा पराजित किए जाने के बाद नेपाल की तराई में शरण लेनी पड़ी थी, जहाँ से उन्हें अंततः गिरफ्तार कर बरेली में सार्वजनिक रूप से मृत्युदंड दिया गया था।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी लियाकत अली ने कर्नल नील के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना के समक्ष शांतिपूर्ण समझौता किया था, जिसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें सम्मानित करते हुए पेंशन पर रिहा कर दिया था।
4. इन तीनों ही केंद्रों पर अंततः ब्रिटिश सेनापतियों—विशेषकर जनरल कैंपबेल और कर्नल नील—द्वारा अत्यधिक क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचलकर पुनः ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा शुरू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं और ब्राह्मणों को कर-मुक्त भूमि प्रदान करना था, जिससे आगे चलकर सामंती व्यवस्था (Feudalism) की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
2. गुप्त काल में सोने के सिक्के (दीनार) बड़ी संख्या में जारी किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि इस काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपनी चरमोत्कर्ष पर था और व्यापारिक संतुलन पूरी तरह से भारत के पक्ष में था।
3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' वे भूमियाँ थीं जो सामान्यतः ब्राह्मणों को दान में दी जाती थीं और इन भूमियों पर राज्य द्वारा किसी भी प्रकार का भू-राजस्व नहीं वसूला जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगर नियोजन प्रणाली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के नगर सामान्यतः एक निश्चित ग्रिड पद्धति (Grid System) पर आधारित थे, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण (Right Angles) पर काटती थीं और नगर दो या अधिक भागों में विभाजित थे, जिनमें पश्चिमी टीला (दुर्ग) शासक वर्ग के लिए और पूर्वी टीला सामान्य नागरिकों के लिए सुरक्षित था।
2. लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) पाए गए हैं, किंतु लोथल में कृत्रिम गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य मिलते हैं जो समुद्री व्यापार की महत्ता को दर्शाता है।
3. सिंधु सभ्यता के लोग तांबे और टिन को मिलाकर कांस्य (Bronze) का निर्माण करना जानते थे, किंतु प्रचुर मात्रा में लौه (Iron) अयस्क की जानकारी होने के कारण उन्होंने बड़े पैमाने पर लोहे के अस्त्र-शस्त्रों और कृषि उपकरणों का भी उत्पादन किया था।
4. इस सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सर्वाधिक अंकन एकशृंगी पशु (Unicorn) का मिलता है, और यहाँ से प्राप्त 'पशुपति शिव' की मुहर पर योग मुद्रा में बैठे देवता के चारों ओर बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा तथा उनके पैरों के पास दो हिरण उत्कीर्ण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश द्वारा ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े और प्रशासनिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण होने लगा।
2. गुप्त काल में 'भूमि छिद्र न्याय' (Bhumichhidra Nyaya) की अवधारणा के अंतर्गत बंजर या अप्रयुक्त भूमि को जोतने वाले को कर से मुक्त स्थायी स्वामित्व प्रदान किया जाता था, जिसका उल्लेख विभिन्न ताम्रपत्र अभिलेखों में मिलता है।
3. गुप्त साम्राज्य की स्वर्ण मुद्राएँ, जिन्हें 'दिनार' कहा जाता था, कुषाणों की स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में सोने की शुद्धता और वजन में अधिक श्रेष्ठ थीं, और गुप्त काल के संपूर्ण इतिहास में इन सिक्कों की शुद्धता और गुणवत्ता में कभी कोई गिरावट नहीं आई।
4. गुप्तोत्तर काल में श्रेणियों (Guilds) या शिल्पियों के संगठनों का प्रभाव और अधिक सुदृढ़ हो गया, तथा मंदसोर अभिलेख से यह स्पष्ट होता है कि रेशम बुनकरों की एक श्रेणी ने अपनी पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों को छोड़कर पूरी तरह से सेना में भर्ती होना स्वीकार कर लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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