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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की सुदृढ़ता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला द्वारा 20 जून 1756 को कलकत्ता पर अधिकार करने के तत्पश्चात ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास से रॉबर्ट क्लाइव और एडमिरल वाटसन के नेतृत्व में एक सशक्त सैन्य टुकड़ी भेजकर फरवरी 1757 में नवाब को 'अलीनगर की संधि' पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य कर दिया था।
  2. 2. प्लासी का युद्ध (23 जून 1757) वास्तव में एक निर्णायक सैन्य संघर्ष से अधिक एक कूटनीतिक षड्यंत्र था, जिसमें नवाब के प्रधान सेनापति मीर जाफर, वित्त प्रमुख दुर्लभ राम और जगत सेठ जैसे प्रमुख अमीरों ने अंग्रेजों के साथ गुप्त समझौता कर युद्ध के मैदान में नवाब की सेना को निष्प्रभावी बना दिया था।
  3. 3. बक्सर के युद्ध (22 अक्टूबर 1764) में मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दोला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को अंग्रेजी सेनापति हेक्टर मुनरो ने पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप क्लाइव ने वर्ष 1765 में 'इलाहाबाद की संधियां' करके बंगाल, बिहार और उड़ीसा में द्वैध शासन (Dual Government) की नींव रखी।
  4. 4. फ्रांसीसी कंपनी के गवर्नर-जनरल ला बुर्दोने और डुप्लेक्स ने कर्नाटक के प्रथम युद्ध (1746-48) के दौरान सेंट थोमे के युद्ध में नवाब अनवरुद्दीन की विशाल सेना को आधुनिक यूरोपीय प्रशिक्षित पैदल सेना और तोपखाने की सहायता से करारी शिकस्त दी थी, जिससे भारतीय शासकों की सैन्य दुर्बलता उजागर हो गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला के विरुद्ध क्लाइव की कूटनीति, अलीनगर की संधि, प्लासी और बक्सर के ऐतिहासिक युद्धों ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रसार के मार्ग को प्रशस्त किया। कर्नाटक के प्रथम युद्ध में सेंट थोमे के युद्ध ने यूरोपीय नौसेना और तोपखाने की श्रेष्ठता को सिद्ध किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, जबकि उनके द्वारा 1828 में स्थापित ब्रह्म समाज ने वेदों की अचूकता और उनके दिव्य होने के सिद्धांत को पूरी तरह स्वीकार किया था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था। 3. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को वैचारिक रूप से जागरूक करना, ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना तथा समाज के वंचित वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में "कारखाना" (Karkhana) क्या था? वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस के आवरण में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। 3. चर्बी वाले कारतूस की घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सैनिकों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए एनफील्ड राइफल्स का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया और पुरानी ब्राउन बेस बंदूकों को पूरी सेना में वापस बहाल कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और इलाहाबाद दरबार में पढ़ी गई 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के प्रभावों तथा प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के नियंत्रण में आ गया, तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर समस्त शक्तियाँ 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित पंद्रह सदस्यीय 'इंडियन काउंसिल' को सौंप दी गईं। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय रियाسतों को हड़पने की अपनी पुरानी विस्तारवादी नीतियों को त्यागती है और देसी राजाओं के दत्तक पुत्र (गोद लेने) लेने के अधिकारों तथा संधियों को पूर्ण मान्यता देती है। 3. घोषणा पत्र में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारत के लोगों की प्राचीन धार्मिक, सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्तियों के दौरान नस्ल, वंश या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। 4. विद्रोह के दौरान अवध के तालुकदारों और बड़े भूस्वामियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यधिक मुखर प्रतिरोध किए जाने के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई से बचते हुए अवध के समस्त तालुकदारों की भूमि को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा और उनकी खोई हुई सारी जागीरें बिना किसी शर्त के वापस लौटा दीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत का कालखंड आधिकारिक रूप से किस वर्ष समाप्त हुआ?
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