BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
18 views

मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अकबर द्वारा आरंभ की गई 'मनसबदारी प्रथा' में 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत स्तर, पद और वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले वास्तविक घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
  2. 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े और तीन घोड़े) की पदोन्नति व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने जात रैंक को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति मिल गई थी।
  3. 3. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत अकबर की 'दहशाला' प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर 'नासक' या 'कंकूट' प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे किसानों पर कर का बोझ कम हो गया और साम्राज्य की आय में भारी वृद्धि हुई।
  4. 4. औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के अंतर्गत वर्ष 1679 में पुनः 'जजिया कर' लागू किया गया, और इसके साथ ही उसने सम्राट के जन्मदिन पर वजन तौलने की पारंपरिक प्रथा 'तुलादान' तथा दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अकबर द्वारा शुरू की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' से अधिकारी के व्यक्तिगत पद और वेतन का पता चलता था, जबकि 'सवार' से उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या निर्धारित होती थी। कथन 2 सही है क्योंकि जहांगीर ने 'दुस्पा-सिंहस्पा' प्रणाली शुरू की थी जिसके तहत मनसबदार बिना 'जात' रैंक बढ़ाए अधिक सवार रख सकते थे। कथन 3 गलत है क्योंकि शाहजहां के शासनकाल में अकबर की 'दहशाला' प्रणाली को समाप्त नहीं किया गया था, बल्कि विभिन्न प्रान्तों में 'नासक' या 'कंकूट' जैसी अन्य प्रणालियों का भी प्रयोग हुआ, किंतु दहशाला का अस्तित्व बना रहा और भू-राजस्व में वृद्धि हुई थी। कथन 4 सही है क्योंकि औरंगजेब ने 1679 में जजिया कर पुनः लगाया और तुलादान तथा दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और इसके क्रांतिकारी कार्यक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें समाजवाद को संगठन का आधिकारिक उद्देश्य बनाया गया। 2. HSRA के सदस्यों ने सांडर्स हत्याकांड (लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए) और 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंकने जैसी सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम दिया, जिसमें भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त भी शामिल थे। 3. वर्ष 1930 में लाहौर षड्यंत्र केस के निर्णय के पश्चात भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई, जबकि चंद्रशेखर आजाद को फरवरी 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया गया था और बाद में उन्हें फांसी की सजा दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों और उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त के अंतर्गत जमींदारों को भू-राजस्व का एक निश्चित हिस्सा कंपनी को देना होता था और यदि वे निर्धारित तिथि तक भुगतान करने में असफल रहते थे, तो उनकी जमींदारी का एक हिस्सा नीलाम कर दिया जाता था, जिसे 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) कहा जाता था। 2. रयतवारी व्यवस्था के तहत ब्रिटिश सरकार ने मध्यवर्ती जमींदारों की पूरी तरह से उपेक्षा करते हुए सीधे किसानों (रयतों) के साथ समझौता किया, और इस प्रणाली में लगान की दरें हमेशा के लिए स्थाई कर दी गईं ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न बढ़े। 3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव या गाँवों के समूह (महाल) को इकाई माना गया था। 4. इन सभी भू-राजस्व प्रणालियों का अंतिम और सबसे गंभीर परिणाम यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ, जिससे किसानों की स्थिति में सुधार होने के बजाय ग्रामीण ऋणग्रस्तता और गरीबी में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने मुंबई में प्रस्ताव पारित किया, तब महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का मंत्र दिया था, लेकिन सुभाष चंद्र बोस देश के भीतर इस आंदोलन के भूमिगत नेतृत्व (Underground Leadership) का हिस्सा थे और उन्होंने राम मनोहर लोहिया तथा अरुणा आसफ अली के साथ मिलकर इसकी योजना बनाई थी। 2. जापान के नियंत्रण वाले सिंगापुर में रास बिहारी बोस के प्रयासों से स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का सर्वोच्च सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व जब सुभाष चंद्र बोस के हाथों में आया, तो उन्होंने सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी। 3. आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था, तथा सुभाष चंद्र बोस ने ही सिंगापुर से रेडियो प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव और चालुक्य राजवंशों के प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया था, तथा महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म 'रथ मंदिरों' का निर्माण कार्य उसी के शासनकाल में प्रारंभ हुआ था। 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव विवरण ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी। 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापिकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी, जबकि कांची के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राजसिंह (नर्सिम्हवर्मन् द्वितीय) के शासनकाल में हुआ था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' तथा महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'भारत के गवर्नर-जनरल' को 'वाइसराय' की अतिरिक्त उपाधि दी गई और लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वाइसराय बने। 2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा में भविष्य में भारतीय राज्यों के ब्रिटिश साम्राज्य में विलय की नीति का पूर्ण परित्याग करने का आश्वासन दिया गया तथा भारतीय शासकों के 'दत्तक पुत्र' लेने के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी गई। 3. घोषणा पत्र के अंतर्गत यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' का संपूर्ण वेतन और प्रशासनिक व्यय ब्रिटेन के राजकोष (British Exchequer) से वहन किया जाएगा ताकि भारतीय जनता पर वित्तीय बोझ न पड़े। 4. विद्रोह के पश्चात सेना के पुनर्गठन के लिए गठित 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ा दिया गया और तोपखाने पर पूर्ण नियंत्रण यूरोपीय सैनिकों का रखा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.