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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का खंडन, बहुदेववाद का विरोध और एकेश्वरवाद का प्रचार करना था, तथा उन्होंने कभी भी पाश्चात्य शिक्षा या आधुनिक विज्ञान का समर्थन नहीं किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बाल विवाह और जाति व्यवस्था का तीव्र विरोध किया।
- 3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात 1866 में देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो आगे चलकर बाल विवाह विरोधी बिल (नेचुरल मैरिज एक्ट, 1872) के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण और अधिक विभाजित हो गया।
- 4. ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका प्रमुख उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और सामाजिक असमानता से मुक्त कराना था, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' इसी वैचारिक संघर्ष पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राजा राममोहन राय ने न केवल सामाजिक-धार्मिक सुधारों पर जोर दिया, बल्कि वे भारत में पाश्चात्य शिक्षा, आधुनिक विज्ञान, अंग्रेजी भाषा और प्रेस की स्वतंत्रता के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे। कथन 2, 3 और 4 बिल्कुल सही हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों की सर्वोच्चता स्थापित की, केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में वैचारिक मतभेद उभरे और ज्योतिराव फुले ने 'सत्यशोधक समाज' के माध्यम से दलितों एवं पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में किन दो भाइयों ने की थी?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करते हुए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया, जिसे बाद में बलबन ने अपनी केंद्रीय सत्ता को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से समाप्त कर दिया था।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की सख्त प्रणाली लागू की, साथ ही साम्राज्य में आर्थिक नियंत्रण के लिए बाजार नियंत्रण नीति के तहत 'दीوان-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की।
3. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित किया और सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलवाए, जिनका मूल्य सोने और चांदी के सिक्कों के बराबर रखा गया, जिससे अर्थव्यवस्था में व्यापक जाली मुद्रा का चलन बढ़ गया।
4. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सर्वाधिक नहरों का निर्माण करवाया तथा बेरोजगारों के लिए 'दीवान-ए-खैरात' और दासों की देखरेख के लिए 'दीवान-ए-बदगां' नामक नए विभागों की स्थापना की, किंतु उसने इक्ता प्रथा को वंशानुगत बना दिया जिससे प्रशासनिक शिथिलता आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई केंद्रीय संगठन और अखिल भारतीय दृष्टिकोण था और न ही कोई सुसंगत भविष्य का राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक एजेंडा था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने केवल अपने स्थानीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ), उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रशिक्षित सैन्य कमांडरों की एक संगठित श्रृंखला थी, जबकि विद्रोहियों के पास नेतृत्व में एकता, सैन्य अनुशासन और रणनीतिक समन्वय का पूर्ण अभाव था।
3. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया था और इसे विदेशी शासन से मुक्ति का एकमात्र साधन माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास तथा नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के शुरुआती वर्षों (1885-1905) में नरमपंथियों की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Pray, Petition and Protest) की संवैधानिक राजनीति पर आधारित थी, और उन्होंने ब्रिटिश शासन को भारत के आधुनिकीकरण के लिए एक वरदान के रूप में देखा था।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल) और अरविंद घोष ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने का समर्थन किया था, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर इसके विस्तार का कड़ा विरोध किया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव और वैचारिक मतभेदों के कारण ऐतिहासिक विभाजन हो गया, जिसमें नरमपंथियों की ओर से रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना गया था।
4. बाल गंगाधर तिलक ने जनता में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के लिए वर्ष 1893 में 'गणेश उत्सव' और वर्ष 1895 में 'शिवाजी उत्सव' की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के माध्यम से राजनीतिक संवाद स्थापित करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रमों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के पश्चात अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंद) घोषित किया गया, जबकि विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में बनी 'न्याय अदालत' के पास थी।
2. ब्रिटिश सेना द्वारा सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के बाद, ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने सम्राट के पुत्रों और पोते को हुमायूं के मकबरे के पास गोली मार कर हत्या कर दी थी, तथा बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया था।
3. दिल्ली में विद्रोह के दौरान सम्राट बहादुर शाह जफर ने सक्रिय रूप से युद्ध रणनीतियों का संचालन किया और संपूर्ण देश के राजाओं व नवाबों को अंग्रेजों के विरुद्ध एक संयुक्त इस्लामिक मोर्चे के गठन हेतु सीधे आदेश जारी किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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