त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
महात्मा गांधी के प्रारंभिक आंदोलनों—चंपारण सत्याग्रह (1917), अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) और खेड़ा सत्याग्रह (1918)—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू 'तिनकठिया' प्रणाली के तहत प्रत्येक बीघा जमीन के तीन कट्ठा हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था, जिसके विरुद्ध गांधीजी ने पहली बार भारत में 'सविनय अवज्ञा' का सफल प्रयोग किया था।
- 2. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में गांधीजी ने प्लेग बोनस को लेकर मिल मालिकों और मजदूरों के बीच चल रहे विवाद में मजदूरों की हड़ताल का समर्थन करते हुए भारतीय इतिहास में पहली बार 'आमरण अनशन' (Hunger Strike) का एक हथियार के रूप में प्रयोग किया था।
- 3. खेड़ा सत्याग्रह में फसल का उत्पादन सामान्य उत्पादन के एक-चौथाई से भी कम होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा राजस्व वसूलने के निर्णय के खिलाफ, गांधीजी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को 'लगान न चुकाने' (No-Tax Campaign) का स्पष्ट निर्देश दिया था।
- 4. इन तीनों शुरुआती आंदोलनों में सफलता प्राप्त करने के पश्चात महात्मा गांधी ने वर्ष 1919 में रौलट एक्ट के विरोध में अखिल भारतीय स्तर पर एक शक्तिशाली 'रौलट सत्याग्रह' का आयोजन किया, जो पूरी तरह से अहिंसक और सफल रहा तथा देश के किसी भी कोने में कोई हिंसा नहीं हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि चंपारण सत्याग्रह के दौरान 'तिनकठिया' प्रथा (कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की अनिवार्य खेती) के विरुद्ध गांधीजी का यह पहला भारत में सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग था। कथन 2 सही है; अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) में मजदूरों के पक्ष में दबाव बनाने के लिए गांधीजी ने अपने जीवन का पहला आमरण अनशन किया था। कथन 3 सही है क्योंकि खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद भू-राजस्व वसूले जाने पर किसानों से लगान न देने का आह्वान किया गया था। कथन 4 गलत है क्योंकि रौलट सत्याग्रह के दौरान देश के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं भड़क उठी थीं, जिससे दुखी होकर गांधीजी ने इसे 'हिमालयन भूल' करार दिया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
1659 ई. में बीजापुर के किस सेनापति को शिवाजी महाराज ने "बाघनख" से मार गिराया था?
→
किस मुगल शासक ने अपनी जीवनी लिखी?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही गतिविधियों के नेतृत्व, मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति तथा विद्रोह के दमन से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पर अधिकार करने के पश्चात वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था।
2. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान और निर्णय लेने की शक्ति सम्राट बहादुर शाह जफर के हाथों में थी, जिन्होंने अत्यंत कुशल सैन्य रणनीति बनाते हुए ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन को पहले ही चरण में पराजित कर दिया था।
3. सितम्बर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के उपरांत हडसन (Hodson) ने हुमायूं के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया तथा उनके दो पुत्रों और एक पौत्र को सरेआम गोली से उड़ा दिया था।
4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें दोषी ठहराते हुए रंगून (मर्मा) निर्वासित कर दिया, जहाँ वर्ष 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झांसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, तात्या टोपे के नेतृत्व में आई राहत सेना के असफल होने के बावजूद रानी लक्ष्मीबाई ने अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए अंग्रेजों को शुरुआती दौर में पीछे हटने के लिए विवश कर दिया था।
2. झांसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में प्रस्थान किया, जहाँ दोनों की संयुक्त सेनाओं ने ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज का कड़ा मुकाबला किया, किंतु कालपी के युद्ध में पराजय के पश्चात उन्होंने ग्वालियर की ओर कूच किया।
3. ग्वालियर के तत्कालीन सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया ने अंग्रेजों का समर्थन करते हुए विद्रोहियों का कड़ा विरोध किया, किंतु तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर के सैनिकों और स्थानीय जनता के सहयोग से किले पर अधिकार कर लिया तथा सिंधिया को आगरा भागने पर विवश कर दिया।
4. ग्वालियर की अंतिम निर्णायक लड़ाई के दौरान रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे ने ग्वालियर से निकलकर राजस्थान और मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया, जिन्हें अंततः उनके एक विश्वासघाती जमींदार मानसिंह के सहयोग से अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
हुमायूँ का मकबरा कहाँ स्थित है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.