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History of India
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ब्रिटिश शासनकाल में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को जमींदारों के लिए स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, लेकिन कुल वसूले गए राजस्व का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा ईस्ट इंडिया कंपनी को तथा मात्र 11 प्रतिशत हिस्सा जमींदारों के प्रशासनिक खर्च और लाभ के रूप में रखा गया था।
  2. 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और काश्तकार (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें किसानों को भूमि का स्वामित्व प्राप्त हुआ और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भू-राजस्व का भुगतान करना पड़ता था।
  3. 3. महालवारी व्यवस्था, जिसे मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब में लागू किया गया था, के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण व्यक्तिगत किसानों के स्तर पर न होकर संपूर्ण गाँव या 'महाल' के आधार पर किया जाता था, और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी जाती थी।
  4. 4. इन सभी भू-राजस्व प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि का आधुनिकीकरण करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक पूंजी निवेश को बढ़ावा देना था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति अत्यधिक समृद्ध हो गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में तीन मुख्य भू-राजस्व प्रणालियाँ लागू की गई थीं—लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में शुरू किया गया स्थाई बंदोबस्त, जिसमें राजस्व का 10/11 भाग (लगभग 89%) कंपनी को और 1/11 भाग जमींदारों को मिलता था; थॉमस मुनरो द्वारा विकसित रयतवारी व्यवस्था जिसमें किसानों (रयतों) को प्रत्यक्ष रूप से भूस्वामी बनाया गया; तथा हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा प्रतिपादित महालवारी व्यवस्था जिसमें संपूर्ण ग्राम (महाल) को इकाई मानकर राजस्व का निर्धारण किया जाता था। कथन 4 असत्य है क्योंकि इन प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि का विकास करना नहीं, बल्कि अधिकतम राजस्व वसूलकर ब्रिटिश औपनिवेशिक हितों को साधना था, जिससे भारतीय कृषि का पतन हुआ और किसान अत्यधिक गरीब हो गए। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड डलहौजी की 'राज्य हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, तथा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के उत्तराधिकारियों से लाल किले की शाही उपाधियाँ और उनके विशेषाधिकार छीन लिए जाने की घोषणा से भारतीय शासक वर्ग और अभिजात वर्ग में भारी असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (De-industrialization) के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो गए, जबकि ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) ने किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ लादकर उन्हें ग्रामीण साहूकारों के चंगुल में फंसा दिया। 3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों को अपने पैतृक पूर्वजों की संपत्ति से वंचित करने वाले पुराने कानून को बदल दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और जबरन धर्मांतरण के एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में देखा। 4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को कम वेतन और 'भत्ता' (Foreign Service Allowance) न दिए जाने की नीति के साथ-साथ वर्ष 1856 के 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार वर्मा या विदेशों में भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया था, सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं को सीधे तौर पर आहत किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 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