BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
24 views

1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिनके घर पर क्रांतिकारी परचे और झंडे मिले थे, तथा कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
  2. 2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष को एक राष्ट्रीय आयाम मिला।
  3. 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ दानापुर से आए विद्रोही सैनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, तथा छपरा में विद्रोहियों ने सरकारी खजाने पर अधिकार कर जेल तोड़कर बंदियों को रिहा कर दिया था।
  4. 4. दानापुर के सैनिकों के विद्रोह के बाद ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के तीन प्रमुख वहाबी नेताओं—मौलाना अहमदुल्लाह, शाह मुहम्मद हुसैन और वाइज उल हक—को बातचीत के बहाने पटना में गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया था, जिससे शहर में तीव्र आक्रोश फैल गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार का क्षेत्र ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा था। पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को पुस्तक विक्रेता पीर अली खान के नेतृत्व में भीषण विद्रोह हुआ, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर ने क्रूरता से दबा दिया। 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और आरा पहुँचकर बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में संघर्ष को धार दी। मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) में भी सैनिकों और स्थानीय जनता ने मिलकर अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी। इसके अतिरिक्त, कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के प्रमुख वहाबी नेताओं (मौलाना अहमदुल्लाह, शाह मुहम्मद हुसैन आदि) को गिरफ्तार कर लिया था। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के बंगाल से बाहर प्रसार को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए थे। 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस के भीतर आसन्न विभाजन टल गया था, क्योंकि उनके अध्यक्षीय भाषण में पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का औपचारिक रूप से उल्लेख किया गया तथा नरमपंथियों व गरमपंथियों के प्रस्तावों के बीच एक स्वीकार्य संतुलन बनाया गया था। 3. सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीखा संघर्ष हुआ, जहाँ नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष की उम्मीदवारी का समर्थन किया, जबकि गरमपंथियों ने लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाने की मांग की थी। 4. सूरत के कांग्रेस अधिवेशन में हुए इस ऐतिहासिक विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हुए गरमपंथी नेताओं—जैसे बाल गंगाधर तिलक को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के लिए मांडले (बर्मा) जेल भेज दिया, जबकि लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल को भी निर्वासित कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → दिल्ली का "बड़ा गुंबद" और "शीश गुंबद" किस वंश के काल में बने थे? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (घोषणा पत्र) के वैधानिक और प्रशासनिक परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के अधीन स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें हड़पने की नीति ('व्यपगत सिद्धांत') का त्याग करती है, देशी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देती है और भविष्य में भारतीय भू-क्षेत्र का कोई विस्तार नहीं किया जाएगा। 3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, प्राचीन परंपराओं का सम्मान करने तथा नस्ल, वर्ण या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का खुला वादा किया। 4. विद्रोह के सफल दमन और प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात काफी घटा दिया और बंगाल सेना में राजपूतों, ब्राह्मणों तथा अवध के सैनिकों की संख्या बढ़ाकर ब्रिटिश रेजिमेंटों को पूरी तरह समाप्त कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते (1931) और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार द्वारा उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने इस समझौते का पूर्ण समर्थन किया था। 2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया था, किंतु द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। 3. समझौते के दौरान गांधी जी ने पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की अपनी मांग पर अत्यधिक जोर दिया था, जिसे वायसराय लॉर्ड इरविन ने बिना किसी शर्त के पूरी तरह स्वीकार कर लिया था। 4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान (दांडी मार्च के पश्चात) भारत के तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने और एकत्र करने का कानूनी अधिकार मिल गया था, जिसे इरविन ने समझौते में मान्यता दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन निकलसन — दिल्ली 2. मेजर जनरल हैवलॉक — लखनऊ 3. कर्नल नील — कानपुर 4. ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.