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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) और उसके पश्चात हुए गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण बहिष्कार किया था, क्योंकि कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन (1929) में ही पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित कर दिया था और वह किसी भी ऐसे सम्मेलन में भाग नहीं लेना चाहती थी जो औपनिवेशिक स्वराज्य के दायरे तक सीमित हो।
- 2. गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने यह स्वीकार किया कि सभी राजनीतिक कैदी—चाहे उन पर हिंसा का आरोप हो या नहीं—तत्काल रिहा कर दिए जाएंगे और नमक कानून में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा।
- 3. इस समझौते के फलस्वरूप महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करने तथा द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने पर सहमति व्यक्त की।
- 4. कराची अधिवेशन (1931), जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया और इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था। कथन 2 गलत है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत केवल उन राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाना तय हुआ था जिन पर हिंसा के मुकदमे नहीं थे, तथा सरकार ने समुद्र तट के पास रहने वाले लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने का अधिकार देना स्वीकार किया था, न कि नमक कानून में पूर्ण संशोधन। कथन 3 सही है, इस समझौते के तहत महात्मा गांधी ने आंदोलन स्थगित किया और लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के लिए राजी हुए। कथन 4 सही है, कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया और पहली बार मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित हुआ। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन से संबंधित 'माउंटबेटन योजना' (3 जून 1947 की योजना) के प्रावधानों और उसके क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना के तहत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का प्रावधान था।
2. बंगाल और पंजाब की विधानसभाओं में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग बैठकें बुलाए जाने का प्रावधान था ताकि वे यह तय कर सकें कि संबंधित प्रांतों का विभाजन किया जाए या नहीं।
3. योजना के अंतर्गत भारत और पाकिस्तान के बीच परिसंपत्तियों, दायित्वों और सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति (15 अगस्त 1947) से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भक्ति आंदोलन और सूफी सिलसिले के विकास तथा उनके वैचारिक एवं दार्शनिक पक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले नयनार (शिव भक्त) और आलवार (विष्णु भक्त) संतों ने जाति व्यवस्था और वैदिक कर्मकांडों का पुरजोर समर्थन किया तथा संस्कृत भाषा को ही अपने उपदेशों का एकमात्र माध्यम बनाया।
2. सूफी संतै हजरत निजामुद्दीन औलिया के समकालीन अमीर खुसरो ने भारतीय संगीत और फारसी संगीत शैलियों का अनूठा समन्वय किया तथा 'कव्वाली' शैली के विकास में विशेष योगदान दिया।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को रामानंद द्वारा प्रसारित किया गया, जिन्होंने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए शूद्रों और महिलाओं को भी अपने शिष्यों के रूप में स्वीकार किया।
4. सूफी संतों का 'चिश्ती सिलसिला' संगीत (समां) और नृत्य को ईश्वर-प्राप्ति का साधन मानता था, जबकि 'सुहरावर्दी सिलसिला' राज्य के नियंत्रण और राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव की नीति का पालन करता था और सुल्तानों से मिलने वाले उपहारों को अस्वीकार कर देता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की प्रारंभिक स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्को डी गामा की 1498 में कालीकट की सफल यात्रा के पश्चात भारत आने वाला दूसरा पुर्तगाلي अभियान पेड्रो अल्वारेस काब्राल के नेतृत्व में आया था, जिसने कोचीन में पुर्तगालियों की पहली व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) स्थापित की थी।
2. भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक माने जाने वाले अल्बुकर्क ने 1510 ई. में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली साम्राज्य का मुख्य प्रशासनिक केंद्र बनाया और क्षेत्र में पुर्तगालियों को स्थानीय भारतीय महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया।
3. नीनो डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर बनने के बाद 1530 में पुर्तगालियों की राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा कर दिया तथा बेसिन और दीव पर अधिकार कर उत्तर भारत में पुर्तगाली प्रभाव का विस्तार किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए अंग्रेजों से ब्रिटिश पेंशन बहाल करने की माँग की, जिसे अस्वीकार किए जाने पर उन्होंने ब्रिटिश छावनी पर अधिकार कर लिया।
2. तात्या टोपे, जो नाना साहब के अत्यंत योग्य और विश्वासपात्र सैन्य कमांडर थे, ने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में भी विद्रोही सेना का प्रभावी नेतृत्व किया और अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का संचालन किया।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष नाना साहब की पेंशन से संबंधित मामलों की पैरवी की थी और बाद में विद्रोह के दौरान कूटनीतिक एवं प्रचार प्रसार की गतिविधियों में प्रमुख भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं को यह निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था कि क्या उनके प्रांतों का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों ने अलग बैठक कर विभाजन के पक्ष में मतदान किया।
2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का प्रावधान था, और सिलहट ने जनमत संग्रह के माध्यम से पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया।
3. रियासतों (Princely States) के भविष्य के निर्धारण के संबंध में माउंटबेटन योजना में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि वे चाहें तो अपनी भौगोलिक स्थिति और जनता की इच्छा के आधार पर भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती हैं, अथवा वे चाहें तो ब्रिटिश क्राउन के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए एक पूर्ण स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र के रूप में भी अस्तित्व में रह सकती हैं।
4. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं के निर्धारण के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा अधिनियमित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के पारित होने से पूर्व ही सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन कर दिया गया था, किंतु इन आयोगों की सीमा-निर्णय रिपोर्टों को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद सार्वजनिक किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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