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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके विभिन्न आयामों के विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश अधिकारी/इतिहासकार ने यह प्रसिद्ध मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह मुख्य रूप से विदेशी शासन के विरुद्ध रूढ़िवादी तत्वों की प्रतिक्रिया और धर्म की रक्षा के नाम पर भड़काया गया एक धार्मिक युद्ध (Religious War) था, जिसमें क्रूरता और बर्बरता का बोलबाला था'?

Detailed Explanation

एल. ई. आर. रीस (L. E. R. Rees) ने अपनी पुस्तक 'ए पर्सनल नरेटिव ऑफ़ दि लखनऊ इनसाइक्लिक' (A Personal Narrative of the Lucknow Outbreak) में यह स्पष्ट मत व्यक्त किया था कि 1857 का विद्रोह इस्लाम का ईसाइयत के विरुद्ध एक धार्मिक युद्ध (A war of fanatical religions against Christians) था। इसके अलावा, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विभिन्न ब्रिटिश इतिहासकारों ने इस महान विद्रोह को अपनी-अपनी राजनीतिक और वैचारिक दृष्टियों से परिभाषित किया है।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के विऔद्योगिकीकरण (Deindustrialization) के परिणामस्वरूप भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार सीधे तौर पर बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने के लिए विवश हो गए। 2. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने यह प्रावधान किया कि हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने अपनी धार्मिक परंपराओं पर सीधा हस्तक्षेप माना। 3. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया था, जिससे केवल राजाओं और नवाबों में असंतोष उत्पन्न हुआ, जबकि ग्रामीण कृषक वर्ग इस नीति से पूरी तरह अप्रभावित रहा। 4. सेना के भीतर लागू 'सामान्य सेवा उपनियम अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार विदेशी भूमि पर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे पारंपरिक समाज में समुद्र यात्रा को वर्जित मानने वाले सैनिकों ने अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अकबर की मृत्यु 1605 ई. में किस बीमारी के कारण हुई थी? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजीमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा की ओर बढ़ गए, जहाँ उन्होंने वीर कुंवर सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्र में विद्रोही गतिविधियों का संचालन करने वाले प्रमुख नेताओं में वारिस अली और जुम्मन खाँ शामिल थे, जिन्हें ब्रिटिश प्रशासन द्वारा दमन के दौरान कठोर सजा दी गई थी। 4. कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के तीन प्रमुख वहाबी नेताओं—अहमदुल्लाह, मोहम्मद हुसैन और वजीर उल हक—को बातचीत के बहाने अपने पास बुलाकर गिरफ्तार कर लिया था, जिससे पटना और आसपास के क्षेत्रों में विद्रोह की आग और भड़क उठी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), कराची कांग्रेस अधिवेशन (1931) और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया था। 2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, और इस सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'साम्प्रदायिक अधिनियर्ण' (Communal Award) के प्रावधानों पर गांधीजी के साथ गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन के बहिष्कार के बावजूद, कांग्रेस ने वर्ष 1931 के अंत में हुए द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में वायसरॉय लॉर्ड विलिंगडन के साथ हुए विशेष समझौते के तहत भाग लिया था, जबकि तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932) का कांग्रेस ने पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था। 4. वर्ष 1932 में जब सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत हुई, तब ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया और गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेताओं को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? गुप्तकालीन और मौर्योत्तर प्रशासनिक व्यवस्था तथा आर्थिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा भूमि अनुदान (Brahmadeya/Agrahara) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे प्रशासनिक और राजकोषीय विशेषाधिकारों से युक्त सामंती प्रवृत्तियों का उदय हुआ। 2. गुप्त काल में 'गुप्तचर विभाग' को 'पुरुष' कहा जाता था और महादण्डनायक नामक अधिकारी मुख्य रूप से न्याय और सैन्य विभाग का उच्च अधिकारी होता था, जबकि 'अधिकरण' नगर स्तर का प्रशासनिक अधिकरण था। 3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में 'दिनार' स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन कुषाणों की स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में शुद्धता और वजन में कहीं अधिक उत्कृष्ट था, जो गुप्त काल के 'स्वर्ण युग' की अद्वितीय आर्थिक समृद्धि को प्रमाणित करता है। 4. गुप्तोत्तर काल के आते-आते विदेशी व्यापार में भारी गिरावट आ गई, विशेष रूप से रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंधों के क्षीण होने के कारण सिक्कों में सोने की मात्रा कम होने लगी और चांदी एवं तांबे के सिक्कों का प्रचलन भी सीमित हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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