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History of India
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में वर्ष 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया और राज्य का हिस्सा हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिससे किसानों की स्थिति मात्र किराएदार या बटाईदार जैसी बनकर रह गई।
  2. 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास तथा बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें बीच के किसी बिचौलिए को मान्यता नहीं दी गई थी और किसानों को भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया था।
  3. 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण की इकाई व्यक्तिगत किसान को न बनाकर पूरे गाँव या 'महाल' (गाँव का समूह) को बनाया गया था, जिसमें संपूर्ण ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी होता था।
  4. 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि ब्रिटिश सरकार ने कृषि के निरंतर विकास को सुनिश्चित करने के लिए हमेशा कर की दरों को अत्यंत न्यूनतम रखा और कभी भी अत्यधिक उच्च राजस्व दरों का निर्धारण नहीं किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि ब्रिटिश काल में ये तीनों भू-राजस्व प्रणालियाँ—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—क्रमशः लॉर्ड कॉर्नवालिस, थॉमस मुनरो तथा हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा लागू की गई थीं, जिनके प्रावधानों और इकाइयों का वर्णन सही दिया गया है। कथन 4 गलत है क्योंकि ब्रिटिश शासन के दौरान भू-राजस्व की दरें अत्यंत उच्च थीं, जिससे किसानों का भारी आर्थिक शोषण हुआ और वे कर्ज के जाल में फंसते चले गए। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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