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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, शिल्प उत्पादन और व्यापारिक तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चन्हूदड़ो (Chanhu-daro) सिंधु सभ्यता का एकमात्र ऐसा स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यह स्थल विशेष रूप से मनके बनाने (Bead making), शंख की कटाई और मुहर निर्माण जैसे शिल्प उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र था।
- 2. लोथल (Lothal) से प्राप्त गोदीवाड़ा (Dockyard) से यह प्रमाणित होता है कि सिंधु सभ्यता के लोग फारस की खाड़ी और मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार करते थे, तथा यहाँ से चावल और बाजरे के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
- 3. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे के धातु विज्ञान से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अपने दैनिक उपकरणों, हथियारों तथा रक्षात्मक ढालों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर लोहे की खानों का दोषण किया था।
- 4. इस सभ्यता के लोग व्यापार के लिए वस्तु-विनिमय (Barter System) प्रणाली पर निर्भर थे, किंतु विनिमय और तोल की सटीक माप के लिए चर्ट (Chert) पत्थर से बने समद्विबाहु घन के आकार के बाटों का प्रयोग करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी, और इसके लोगों को लोहे (Iron) का कोई ज्ञान नहीं था; अतः कथन 3 असत्य है। चन्हूदड़ो बिना दुर्ग वाला एकमात्र प्रमुख औद्योगिक नगर था जहाँ मनके बनाने का कारखाना था, और लोथल एक प्रमुख बंदरगाह था। इसके अतिरिक्त, बाटों का निर्माण सामान्यतः चर्ट नामक पत्थर से होता था। सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण, गांधी-इरविन समझौते और कराची कांग्रेस अधिवेशन (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा गठित 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती संगठन) ने आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर गढ़वाल रेजिमेंट के सैनिकों ने गोली चलाने से इनकार कर दिया था।
2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के समीप के निवासियों को नमक बनाने का अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की, जबकि कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की शर्त स्वीकार कर ली।
3. कराची में मार्च 1931 में आयोजित कांग्रेस के विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था।
4. गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित इस कराची अधिवेशन में देश के युवाओं और वामपंथी विचारधारा के लोगों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी गई फांसी के निर्णय को रोकने में गांधीजी की विफलता के कारण उन्हें काले झंडे दिखाए और तीव्र विरोध प्रदर्शन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर के दरबार का गायक:
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पानीपत के प्रथम युद्ध के समय इब्राहिम लोदी की हार का एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक कारण क्या था?
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