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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
- 2. कानपुर और लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेवलॉक
- 3. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
- 4.
बिहार - विलियम टेलर और विसेंट आयर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने सबसे अनुभवी सेनापतियों को नियुक्त किया था। दिल्ली में विद्रोह का दमन जॉन निकलसन और हडसन ने किया था (जहाँ निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी)। कानपुर और लखनऊ में विद्रोह को कुचलने का मुख्य श्रेय सर कॉलिन कैंपबेल, हैवलॉक और आउट्राम को जाता है। झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व करने वाले ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज थे, जिन्होंने झांसी के पतन के बाद ह्यूरोज ने टिप्पणी की थी कि 'भारतीय विद्रोहियों में एकमात्र मर्द लक्ष्मीबाई थी'। इसके अतिरिक्त, बिहार के आरा और पटना क्षेत्र में विद्रोह का दमन विलियम टेलर और विसेंट आयर द्वारा किया गया था। इस प्रकार दिए गए सभी युग्म पूरी तरह सही सुमेलित हैं। इस ऐतिहासिक संघर्ष के विस्तृत विवरण के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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उत्तर वैदिक काल (Late Vedic Period) की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस काल में ऋग्वैदिक काल की तुलना में कबीलाई समाज क्षेत्रीय जनपदों में बदलने लगा, जिससे 'राष्ट्र' शब्द का उदय हुआ और राजा का अधिकार क्षेत्र कबीले (जन) से बदलकर क्षेत्र (जनपद) पर केंद्रित हो गया।
2. लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'श्याम अयस' कहा गया है) ने कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिसके परिणामस्वरूप घुमक्कड़ जीवनशैली समाप्त हुई और स्थायी बस्तियों तथा भूमि पर व्यक्तिगत स्वामित्व की भावना का विकास हुआ।
3. 'विदथ' संस्था, जो ऋग्वैदिक काल में जन-साधारण के विचार-विमर्श और धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र थी, उत्तर वैदिक काल तक आते-आते पूरी तरह समाप्त हो गई, जबकि 'सभा' और 'समिति' में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और अधिक बढ़ गई।
4. गोत्र व्यवस्था की संस्था इसी काल में स्थापित हुई, जिसके अंतर्गत सगोत्र विवाह वर्जित कर दिए गए और समाज स्पष्ट रूप से चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) में विभाजित हो गया, जहाँ शूद्रों को उपनयन संस्कार से वंचित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती सत्याग्रहों—विशेष रूप से चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—तथा असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने तिनकथा प्रणाली के विरोध में आवाज उठाई थी, जिसके अंतर्गत यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना बाध्य किया जाता था।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद भू-राजस्व वसूली के ब्रिटिश कानूनों के खिलाफ किसानों का नेतृत्व किया और इंदुलाल याज्ञिक तथा वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने इस आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. वर्ष 1920 में शुरू हुए असहयोग आंदोलन के दौरान कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में आंदोलन के प्रस्ताव का सभी प्रमुख राष्ट्रवादियों ने एकमत से स्वागत किया था और चित्तरंजन दास ने इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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