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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रणाली शुरू की, साथ ही बाजार नियंत्रण के सफल क्रियान्वयन के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक नए अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
  2. 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी प्रशासनिक राजधानी को दिल्ली से बदलकर देवगिरि (दलताबाद) स्थानांतरित किया ताकि वह साम्राज्य के केंद्र से देश के दक्षिणी हिस्सों पर बेहतर नियंत्रण रख सके, और उसने कृषि के विकास के लिए 'दीवान-ए-कोहकी' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की थी।
  3. 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत की वित्तीय व्यवस्था में सुधार करते हुए शरीयत के अनुसार केवल चार प्रकार के करों (खराज, जकात, जजिया और खुम्स) को वैध करार दिया, तथा सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया, जिन पर उसने कृषकों से 'हर्ब-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) नामक कर वसूल किया था।
  4. 4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने सल्तनत की कमजोर होती केंद्रीय सत्ता को पुनर्जीवित करने के लिए सुल्तान की निरंकुशता को बढ़ावा दिया और तुर्की सरदारों के प्रभाव को समाप्त कर सम्पूर्ण सत्ता अपने हाथों में केंद्रित कर ली थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को मजबूत करने के लिए दाग और हुलिया प्रथा के साथ नकद वेतन और बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की थी, जिसके लिए 'दीवान-ए-रियासत' की स्थापना की गई थी। मुहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी परिवर्तन और कृषि के लिए विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'दीवान-ए-कोहकी' की स्थापना की थी। फिरोजशाह तुगलक ने केवल चार शरीयत सम्मत कर रखे और सिंचाई कर (हर्ब-ए-शर्ब) वसूला। किंतु कथन 4 असत्य है, क्योंकि बहलोल लोदी ने सुल्तान की निरंकुशता को बढ़ावा देने के बजाय 'अफगान अमीरों की समानता' के सिद्धांत (मसनद-ए-आली) को अपनाया था।
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