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General Science
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हार्मोनल नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटेटिन' (Somatostatin) हार्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior pituitary gland) से वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) के स्राव को रोकता है।
- 2. एड्रेनल ग्रंथि का मेडुला भाग 'एपिनफ्राइन' और 'नॉरएपिनफ्राइन' हार्मोन का स्राव करता है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में 'फाइट-ऑर-फ्लाईट' (Fight-or-Flight) प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
- 3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित कैल्सीटोनिन (Calcitonin) हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाता है, जबकि पैराथायराइड हार्मोन (PTH) रक्त में कैल्शियम के स्तर को घटाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: हाइपोथैलेमस से स्रावित सोमाटोसटेटिन (Somatostatin) एक निरोधी हार्मोन है जो अग्र पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) के स्राव को रोकता है। कथन 2 सही है: एड्रेनल मेडुला (Adrenal medulla) कैटेकोलामाइन्स यानी एपिनेफ्रीन (एड्रेनालाईन) और नॉरएपिनेफ्रीन का स्राव करता है, जो संकटकालीन या 'फाइट-ऑर-फ्लाईट' (Fight-or-Flight) प्रतिक्रिया के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। कथन 3 गलत है: थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित कैल्सीटोनिन (Calcitonin) रक्त में कैल्शियम के स्तर को घटाता है (हाइपोकैल्सेमिक प्रभाव), जबकि पैराथायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित पैराथर्मोन (PTH) रक्त में कैल्सियम के स्तर को बढ़ाता है (हाइपरकैल्सेमिक प्रभाव)। अतः कथन 3 विपरीत दिया गया है। अंतःस्रावी तंत्र के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयस्कता (Isomerism) तथा ईंधनों के दहन और ऑक्टेन संख्या के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) के शाखित श्रृंखला (Branched-chain) वाले समवयस्क, सीधी श्रृंखला (Straight-chain) वाले समवयस्क की तुलना में अधिक ऑक्टेन संख्या प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि शाखित संरचनाओं में स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) और 'नॉक-इफेक्ट' (Knocking) के प्रति प्रतिरोध क्षमता अधिक होती है।
2. 'फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया' (Fischer-Tropsch process) एक ऐसी उत्प्रेरकीय विधि है जिसके माध्यम से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के गैसीय मिश्रण (वाटर गैस) को उच्च तापमान और दाब पर गैसोलीन (तरल हाइड्रोकार्बन) जैसे सिंथेटिक ईंधनों में परिवर्तित किया जाता है।
3. द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) के मुख्य घटक प्रोपेन और ब्यूटेन हैं, और घरेलू उपयोग के दौरान गैस रिसाव का तुरंत पता लगाने के लिए इसमें 'एथिल मर्कैप्टेन' ($C_2H_5SH$) नामक गंधयुक्त यौगिक मिलाया जाता है, जिसका रासायनिक सूत्र सल्फर-युक्त होने के कारण तीव्र दुर्गंध उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद् (Gametophyte) होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रकाश संश्लेषण करता है।
2. C$_4$ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की 'हैच-स्लैग चक्र' (Hatch-Slack Pathway) प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक $CO_2$ ग्राही यौगिक फॉस्फोइनोलपाइरुवेट (PEP) होता है, जो पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में स्थित होता है और यह एंजाइम PEPcase द्वारा उत्प्रेरित होता है।
3. 'ऑक्सिन' (Auxin) पादप हार्मोन कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation) और शीर्ष प्रमुखता (Apical dominance) को प्रेरित करता है, जबकि 'साइटोकाइनिन' (Cytokinin) पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को रोककर शीर्ष प्रमुखता को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वसंधि) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है, तथा यह बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को तोड़कर उनमें अमाइलेज एंजाइम के संश्लेषण को प्रेरित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के वैسكريक और सैद्धांतिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राउल के नियम (Raoult's Law) के अनुसार, किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर प्राप्त विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलयन में विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के बराबर होता है, और यह नियम केवल तनु विलयनों पर ही कड़ाई से लागू होता है।
2. 'सजातीय उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी द्रव या सभी गैस) में होते हैं, उदाहरणार्थ- सीस-चेंबर विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में नाइट्रिक ऑक्साइड ($NO$) का उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना।
3. 'उत्प्रेरक विष' (Catalytic Poison) वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो उत्प्रेरक की सतह पर सक्रिय केंद्रों (Active centers) से खुद को स्थायी रूप से जोड़कर उत्प्रेरक की सक्रियता (Catalytic activity) को बढ़ा देते हैं, जिससे रासायनिक अभिक्रिया का वेग कई गुना तीव्र हो जाता है।
4. वांट हॉफ गुणांक ($i$) का मान किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में वियोजन (Dissociation) होने पर 1 से अधिक होता है, जबकि संगुणन (Association) होने पर इसका मान 1 से कम होता है, और यह अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के सैद्धांतिक और प्रायोगिक मान के अंतर को स्पष्ट करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु के नाभिक में कौन से कण होते हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक का प्रतिरोध उसके ताप में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि ताप बढ़ने पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत विश्रांतिक काल (Relaxation time) घट जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की आयनों के साथ संघट्टों की आवृत्ति बढ़ जाती है।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जो केवल बन्द परिपथों पर लागू होता है और इसके अनुसार किसी बन्द पाथ में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस पाथ के विभिन्न भागों में उत्पन्न विभवांतरों के बीजीय योग के बराबर होता है।
4. यदि एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तांबे के तार को खींचकर उसकी लंबाई को दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध चार गुना हो जाता है और उसकी विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) भी दोगुनी हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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