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General Science
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों के संयोजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब समान मान के तीन प्रतिरोधकों को पहले श्रेणी क्रम (Series combination) में और फिर उन्हीं प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो दोनों स्थितियों में कुल तुल्य प्रतिरोध का अनुपात 9:1 होता है।
- 2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
- 3. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत उच्च सटीकता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की स्थिति में तब होता है जब धारामापी (Galvanometer) से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: यदि तीन समान प्रतिरोधक प्रत्येक $R$ मान के हैं, तो श्रेणी क्रम में तुल्य प्रतिरोध $R_s = 3R$ होगा। समांतर क्रम में तुल्य प्रतिरोध $R_p = R/3$ होगा। इनका अनुपात $R_s / R_p = 3R / (R/3) = 9:1$ होगा। कथन 2 सही है: किर्चॉफ का धारा नियम (KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर कार्य करता है। कथन 3 सही है: व्हीटस्टोन सेतु का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए किया जाता है और संतुलन की स्थिति ($P/Q = R/S$) में गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता है। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार की लंबाई को खींचकर दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है, बशर्ते उसका आयतन और तापमान अपरिवर्तित रहें।
2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत उच्च यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित अवस्था में होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
3. जब समान क्षमता के कई सेलों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है, जो तब सबसे लाभदायक होता है जब बाह्य प्रतिरोध आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक हो।
4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power dissipation) केवल धारा के वर्ग ($I^2$) और प्रतिरोध ($R$) के गुणनफल पर निर्भर करता है, और यह परिपथ में जुड़े प्रतिरोधकों के श्रेणी या समानांतर विन्यास से स्वतंत्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोडियम और पोटैशियम जैसी अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातुएँ मिट्टी के तेल (Kerosene) में डुबोकर रखी जाती हैं क्योंकि हवा के संपर्क में आने पर ये कमरे के तापमान पर ही स्वतः प्रज्वलित होकर जल उठती हैं।
2. 'एक्वा रेजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 के अनुपात में एक ताज़ा मिश्रण होता है, जो स्वर्ण और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को भी घोलने की क्षमता रखता है।
3. सफेद फास्फोरस (White phosphorus) अत्यधिक अभिक्रियाशील और विषैला होता है, जो पानी में घुलनशील होने के कारण पानी के नीचे संग्रहित किया जाता है और अंधेरे में चमकने का गुण (Phosphorescence) प्रदर्शित करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कौन सा तत्व सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक (Electronegativity) है?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न आनुवंशिक और संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों तथा प्रभावित अंगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'हंटिंग्टन रोग' (Huntington's disease) एक ऑटोसोमल प्रभावी (Autosomal dominant) आनुवंशिक विकार है, जो गुणसूत्र 4 पर स्थित HTT जीन में 'CAG' ट्रिन्यूक्लियोटाइड रिपीट के असामान्य विस्तार के कारण होता है।
2. 'प्रियन' (Prions) संक्रामक प्रोटीन कण होते हैं जो किसी भी न्यूक्लिक एसिड (DNA या RNA) से रहित होते हैं, और ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके 'क्रूटत्ज़फील्ड-जैकोब रोग' (CJD) जैसी घातक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं।
3. 'विल्सन रोग' (Wilson's disease) एक ऑटोसोमल अप्रभावी विकार है जिसमें शरीर में तांबे (Copper) का अत्यधिक संचय मुख्य रूप से यकृत और मस्तिष्क में होने लगता है, और इसका संबंध ATP7B जीन के उत्परिवर्तन से है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन, विलगित गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को 'आयनन एन्थैल्पी' (Ionization Enthalpy) कहते हैं, और आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटने के कारण आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) हमेशा ऋणात्मक होती है, जिसका अर्थ है कि किसी गैसीय परमाणु में इलेक्ट्रॉन के प्रवेश करने पर ऊर्जा सदैव उत्सर्जित ही होती है, चाहे परमाणु का आकार कुछ भी हो।
3. फ्लोरिन की विद्युतऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर सभी तत्वों में सर्वाधिक होती है, जिसके कारण यह रासायनिक यौगिकों में केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था ही प्रदर्शित करता है, जबकि क्लोरीन धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दर्शा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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