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General Science
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार (Lewis base) इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाले दाता होते हैं।
  2. 2. 'बफर विलयन' (Buffer solution) वे जलीय विलयन होते हैं जो बाहर से थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाए जाने पर अपने pH मान में होने वाले परिवर्तन का प्रबल विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल तथा सोडियम एसिटेट का मिश्रण है।
  3. 3. आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic force) कार्य करता है, जिसके कारण ठोस अवस्था में ये विद्युत के सुचालक होते हैं जबकि गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत चालन करने में असमर्थ हो जाते हैं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लुईस अवधारणा के अनुसार, अम्ल इलेक्ट्रॉन युग्मग्राही (Electron-pair acceptor) होते हैं और क्षार इलेक्ट्रॉन युग्मदाता (Electron-pair donor) होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि बफर विलयन pH परिवर्तन का प्रतिरोध करते हैं और कमजोर अम्ल तथा उसके लवण का मिश्रण अम्लीय बफर बनाता है जैसे $CH_3COOH$ और $CH_3COONa$। कथन 3 गलत है क्योंकि आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि उनके आयन अपनी निश्चित स्थितियों पर बंधे होते हैं; किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में उनके आयन स्वतंत्र रूप से गति करने के लिए मुक्त हो जाते हैं, जिससे वे विद्युत के सुचालक बन जाते हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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