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General Science
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वंशागति के क्रोमोसोमी सिद्धांत (Chromosomal theory of inheritance) और लिंग निर्धारण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सटन और बोवेरी ने यह प्रतिपादित किया कि जीन और गुणसूत्र दोनों जोड़े में होते हैं, और युग्मक निर्माण के दौरान गुणसूत्रों का अलग होना (Segregation) उनके ऊपर स्थित जीनों के विलगन को निर्धारित करता है।
  2. 2. 'ZZ-ZW' प्रकार का लिंग निर्धारण तंत्र पक्षियों, कुछ सरसृपों (Reptiles) और तितलियों में पाया जाता है, जिसमें नर विषमयुग्मकी (Heterogametic, ZW) होते हैं और मादा समयुग्मकी (Homogametic, ZZ) होती हैं।
  3. 3. ड्रोसोफिला मेलैनोस्टर (फल मक्खी) में लिंग निर्धारण 'गेनिक संतुलन सिद्धांत' (Genic balance theory) पर आधारित है, जिसे काल्विन ब्रिजेस द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसके अनुसार लिंग का निर्धारण X गुणसूत्रों की संख्या और ऑटोसोम के सेटों के अनुपात द्वारा होता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: वाल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी ने स्वतंत्र रूप से 1902 में वंशागति का क्रोमोसोमी सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने यह बताया कि गुणसूत्रों का व्यवहार मेन्डल के कारकों (जीन) के समान ही समानांतर होता है। कथन 2 गलत है: 'ZZ-ZW' प्रकार के लिंग निर्धारण तंत्र में **मादा** विषमयुग्मकी (ZW) होती हैं और दो प्रकार के अंडे देती हैं (Z और W), जबकि नर समयुग्मकी (ZZ) होते हैं। यह तंत्र पक्षियों, मछलियों और कुछ सरीसृपों में पाया जाता है। इसके विपरीत, 'XX-XY' प्रकार में नर विषमयुग्मकी होते हैं। कथन 3 सही है: काल्विन ब्रिजेस (Calvin Bridges) ने ड्रोसोफिला में लिंग निर्धारण को समझाने के लिए 'गेनिक संतुलन सिद्धांत' प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार लिंग X गुणसूत्रों और ऑटोसोम के सेटों (X/A अनुपात) के बीच के संतुलन द्वारा निर्धारित होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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