त्वरित लिंक्स
General Science
24 views
वंशागति के क्रोमोसोमी सिद्धांत (Chromosomal theory of inheritance) और लिंग निर्धारण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सटन और बोवेरी ने यह प्रतिपादित किया कि जीन और गुणसूत्र दोनों जोड़े में होते हैं, और युग्मक निर्माण के दौरान गुणसूत्रों का अलग होना (Segregation) उनके ऊपर स्थित जीनों के विलगन को निर्धारित करता है।
- 2. 'ZZ-ZW' प्रकार का लिंग निर्धारण तंत्र पक्षियों, कुछ सरसृपों (Reptiles) और तितलियों में पाया जाता है, जिसमें नर विषमयुग्मकी (Heterogametic, ZW) होते हैं और मादा समयुग्मकी (Homogametic, ZZ) होती हैं।
- 3. ड्रोसोफिला मेलैनोस्टर (फल मक्खी) में लिंग निर्धारण 'गेनिक संतुलन सिद्धांत' (Genic balance theory) पर आधारित है, जिसे काल्विन ब्रिजेस द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसके अनुसार लिंग का निर्धारण X गुणसूत्रों की संख्या और ऑटोसोम के सेटों के अनुपात द्वारा होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वाल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी ने स्वतंत्र रूप से 1902 में वंशागति का क्रोमोसोमी सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने यह बताया कि गुणसूत्रों का व्यवहार मेन्डल के कारकों (जीन) के समान ही समानांतर होता है। कथन 2 गलत है: 'ZZ-ZW' प्रकार के लिंग निर्धारण तंत्र में **मादा** विषमयुग्मकी (ZW) होती हैं और दो प्रकार के अंडे देती हैं (Z और W), जबकि नर समयुग्मकी (ZZ) होते हैं। यह तंत्र पक्षियों, मछलियों और कुछ सरीसृपों में पाया जाता है। इसके विपरीत, 'XX-XY' प्रकार में नर विषमयुग्मकी होते हैं। कथन 3 सही है: काल्विन ब्रिजेस (Calvin Bridges) ने ड्रोसोफिला में लिंग निर्धारण को समझाने के लिए 'गेनिक संतुलन सिद्धांत' प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार लिंग X गुणसूत्रों और ऑटोसोम के सेटों (X/A अनुपात) के बीच के संतुलन द्वारा निर्धारित होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
पदार्थ के सामान्य गुणों — पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की श्यानता (Viscosity) उसकी विभिन्न परतों के बीच होने वाली सापेक्षिक गति का विरोध करने वाला आंतरिक घर्षण बल है, और ताप में वृद्धि होने पर जहाँ द्रवों की श्यानता घट जाती है, वहीं गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है।
2. 'केशिकत्व' (Capillarity) की परिघटना मुख्य रूप से द्रव के अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बल (Cohesive force) और द्रव तथा ठोस नली की दीवार के बीच लगने वाले आसंजक बल (Adhesive force) के पारस्परिक अंतर पर निर्भर करती है, जिसके कारण काँच की नली में जल ऊपर चढ़ता है जबकि पारा नीचे की ओर दब जाता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर एक ऊर्ध्वगामी उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, जिसका केंद्र हटाए गए तरल के आयतन के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Center of Buoyancy) कहते हैं।
4. यदि कोई ठोस वस्तु किसी द्रव में तैर रही है, तो वस्तु का कुल भार उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार से अधिक होता है, और वस्तु का गुरुत्व केंद्र तथा उत्प्लावन केंद्र हमेशा एक ही क्षैतिज रेखा पर स्थित होने पर ही वह स्थायी संतुलन में रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) सामान्यतः घटती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होना है, जिससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित होते हैं।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (F) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन (Cl) से अधिक ऋणात्मक (उच्चतम) होती है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है।
3. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण, 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग उनके ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाती हैं।
4. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का क्रमिक मान किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉनों को निकालने की कठिनाई को दर्शाता है, और किसी भी उदासीन परमाणु की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी हमेशा उसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका?
→
मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में स्थित अल्फा कोशिकाएँ 'ग््लूकागॉन' (Glucagon) हॉर्मोन का स्रावण करती हैं, जो एक हाइपरग्लाइसेमिक (Hyperglycemic) कारक है और यकृत में ग्लाइकोजेनोलिसिस तथा ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है।
2. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' (Calcitonin) एक पेप्टाइड हॉर्मोन है जो रक्त में कैल्शियम और फॉस्फेट के स्तर को कम करने का कार्य करता है, और यह पैराथाइरॉइड हॉर्मोन (PTH) के विपरीत प्रभाव प्रदर्शित करता है।
3. अधिवृक्क मज्जा (Adrenal Medulla) द्वारा 'एपिनेफ्रिन' और 'नॉरएपिनेफ्रिन' कैटेकोलामाइन्स का स्रावण किया जाता है, जिन्हें 'आपातकालीन हॉर्मोन' या 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) हॉर्मोन कहा जाता है, जो हृदय की धड़कन, श्वसन दर और पुतलियों के फैलाव को त्वरित रूप से बढ़ाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
कोयला?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.