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General Science
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परमाणु भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'डी ब्रॉग्ली परिकल्पना' के अनुसार, प्रत्येक गतिमान द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) के साथ एक तरंग जुड़ी होती है, जिसे पदार्थ तरंग (Matter wave) कहते हैं, और इस तरंग की तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  2. 2. हाइजेनबर्ग के 'अनिश्चितता का सिद्धांत' के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ पूर्णतः यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और यदि स्थिति के मापन में अनिश्चितता शून्य कर दी जाए, तो संवेग के मापन में अनिश्चितता अनंत हो जाएगी।
  3. 3. प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric effect) की व्याख्या आइंस्टीन द्वारा प्लांक के क्वांटम सिद्धांत के आधार पर की गई थी, जिसके अनुसार आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है, भले ही प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से कम क्यों न हो।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: डी ब्रॉग्ली परिकल्पना के अनुसार, द्रव्य कण की तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{p}$ होती है, जहाँ $h$ प्लांक स्थिरांक और $p$ संवेग है। अतः तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। कथन 2 सही है: हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत $(\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{\hbar}{2})$ के अनुसार, स्थिति ($\Delta x$) और संवेग ($\Delta p$) का एक साथ सटीक मापन असंभव है। यदि स्थिति अनिश्चितता शून्य हो, तो संवेग अनिश्चितता अनंत होगी। कथन 3 गलत है: प्रकाश-विद्युत प्रभाव में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की **आवृत्ति** पर निर्भर करती है, **तीव्रता** पर नहीं। तीव्रता बढ़ाने से केवल उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (धारा) बढ़ती है, गतिज ऊर्जा नहीं। इसके अतिरिक्त, यदि आवृत्ति देहली आवृत्ति से कम है, तो कोई इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित ही नहीं होगा। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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