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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक दीर्घकालिक जीवाणु जनित संक्रमण है जो 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' (Mycobacterium leprae) के कारण होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं तथा त्वचा को प्रभावित करता है।
- 2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणु जनित तीव्र न्यूरोलॉजिकल रोग है जो लिस्सावायरस (Lyssavirus) के कारण होता है, और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करने के बाद इस रोग की मृत्यु दर लगभग 100% तक होती है।
- 3. 'कालाजार' (Kala-azar) एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है जो 'लिसरनिया डोनोवानी' (Leishmania donovani) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जिसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी) के काटने से होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कुष्ठ रोग (हैनसेन रोग) 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक दीर्घकालिक संक्रमण है जो मुख्य रूप से त्वचा और परिधीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। कथन 2 सही है क्योंकि रेबीज एक घातक विषाणु जनित रोग है जो रब्डोविराइडै कुल के लिस्सावायरस के कारण होता है और इसके लक्षण प्रकट होने के बाद यह लगभग शत-प्रतिशत घातक होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'कालाजार' (विसेरल लीशमैनियासिस) कोई जीवाणु जनित रोग नहीं है, बल्कि यह 'लीशमैनिया' वंश के प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है, न कि बैक्टीरिया के, और इसका संचरण मादा सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें संवहन ऊतक (Xylem and Phloem) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।
2. C4 पौधों में प्रकाश संश्लेषण की 'कैल्विन चक्र' क्रिया बंडल शीथ कोशिकाओं (Bundle sheath cells) के भीतर होती है, और इनमें प्राथमिक $CO_2$ ग्राही मैलिक अम्ल होता है जबकि मेसोफिल कोशिकाओं में यह कार्य PEP carboxylase द्वारा किया जाता है।
3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक तनाव हॉर्मोन है जो रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, जबकि 'जिब्रेलिन' (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्वसंधि (Internode) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' (Blood-Brain Barrier - BBB) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह मस्तिष्क की केशिकाओं (Capillaries) की एंडोथेलियल कोशिकाओं के बीच पाए जाने वाले 'टाइट जंक्शन' (Tight Junctions) द्वारा निर्मित होता है, जो रक्त से मस्तिष्क के ऊतकों में हानिकारक पदार्थों के प्रवेश को रोकता है।
2. लिपिड-घुलनशील (Lipid-soluble) अणु जैसे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड इस बैरियर को आसानी से पार कर लेते हैं, जबकि अधिकांश जल-घुलनशील (Water-soluble) अणु इसके पार नहीं जा सकते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और उनके जैव-रासायनिक उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें यकृत और कंकाल पेशियों में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में अपघटन होता है, जिसे 'ग्लाइकोजन फास्फोराइलेज' एंजाइम उत्प्रेरित करता है।
2. ग्लूकोनियोजेनेसिस (Gluconeogenesis) के दौरान, गैर-कार्बोहाइड्रेट स्रोतों जैसे कि लैक्टेट, ग्लिसरोल और ग्लूकोजेनिक अमीनो अम्ल से ग्लूकोज का संश्लेषण होता है, जो मुख्य रूप से अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं में संपन्न होता है।
3. वसा अम्लों के बीटा-ऑक्सीडेशन (Beta-oxidation) की प्रक्रिया माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होती है, जिससे एसिटाइल-CoA के अणु बनते हैं जो सीधे क्रेब्स चक्र में प्रवेश करके एटीपी का उत्पादन करते हैं।
4. प्रोटीन कुपोषण के कारण होने वाले गंभीर विकार 'क्वाशियोकोर' (Kwashiorkor) में आहार में प्रोटीन और कुल कैलोरी दोनों की भीषण कमी होती है, जबकि 'मॅरास्मस' (Marasmus) में मुख्य रूप से केवल प्रोटीन की गंभीर कमी होती है और इसमें एडिमा (Edema) प्रमुख लक्षण के रूप में देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. पारसिक (Parsec): यह खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है।
2. एकैनॉस्टिकल मात्रक (Astronomical Unit - AU): यह पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी है, जिसका मान लगभग $1.496 imes 10^{11}$ मीटर होता है।
3. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity): CGS पद्धति में इसका मात्रक 'पॉइज' (Poise) है, और इसका विमीय सूत्र $[M^1 L^{-1} T^{-1}]$ होता है।
4. प्रकाश वर्ष (Light-year): यह समय की एक अत्यधिक बड़ी इकाई है जिसका उपयोग ब्रह्मांड की आयु मापने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और रासायनिक उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम पर आधारित एक ऐसा अणुसंख्यक गुणधर्म है जो विलेय की सांद्रता के साथ-साथ उसकी रासायनिक प्रकृति पर भी निर्भर करता है।
2. क्वथनांक उन्नयन ($\Delta T_b$) और हिमांक अवनमन ($\Delta T_f$) विलायक के मोलल स्थिरांक ($K_b$ और $K_f$) पर निर्भर करते हैं, जो कि विलायक के विशिष्ट भौतिक गुणों से संबंधित होते हैं और विलेय के अणुभार की गणना करने में सहायक होते हैं।
3. विषमांग उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, और 'अधिशोषणा सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार अभिकर्मक उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित होकर अपनी सक्रियण ऊर्जा को कम कर लेते हैं।
4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और प्रभावी होते हैं, जिनकी क्रियाविधि 'प्रेरित फिट' (Induced fit) या 'ताला-कुंजी' मॉडल द्वारा समझाई जाती है, तथा ये उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित कर अग्र अभिक्रिया को तीव्र कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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