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General Science
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'टिटनेस' (Tetanus), जिसे धनुषस्तंभ भी कहा जाता है, 'क्लोस्ट्रीडियम टिटानी' (Clostridium tetani) नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न एक्सोटॉक्सिन (टिटैनोस्पैस्मिन) के कारण होता है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके कंकाल पेशियों में लगातार दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है।
  2. 2. 'डिप्थीरिया' (Diphtheria) एक संक्रामक जीवाणु जनित रोग है जो 'कोर्неबैक्टीरियम डिप्थीरिया' (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन पथ को प्रभावित करता है तथा गले में एक विशिष्ट 'सफेद झूठी झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है।
  3. 3. 'परटूसिस' (Pertussis), जिसे काली खांसी भी कहा जाता है, 'बोरडेटा परटूसिस' (Bordetella pertussis) नामक जीवाणु के कारण होता है, जिसका संचरण वायु जनित बूंदों (Droplets) के माध्यम से होता है और यह मुख्य रूप से फेफड़ों तथा श्वासनली को प्रभावित करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। टिटनेस (Tetanus), डिप्थीरिया (Diphtheria) और परटूसिस (Kali Khasi) तीनों ही गंभीर जीवाणु जनित (Bacterial) संक्रमण हैं, जिनकी रोकथाम के लिए बच्चों को बचपन में DPT का टीका लगाया जाता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, टिटनेस का जीवाणु क्लोस्ट्रीडियम टिटानी मिट्टी, धूल या जंग लगे लोहे के माध्यम से शरीर के खुले घावों में प्रवेश करता है। डिप्थीरिया गले को प्रभावित करता है और स्यूडोमेम्ब्रेन बनाता है, जबकि पर्टुसिस में तीव्र और पुरानी खांसी आती है।
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'लैंथानाइड संकुचन' (Lanthanoid Contraction) का मुख्य कारण 4f-इलेक्ट्रॉनों का अत्यंत दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) है, जिसके परिणाम स्वरूप 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम) का आकार ठीक उनके ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम) के लगभग समान हो जाता है। 3. ऑक्साइडों की प्रकृति के संबंध में, आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों के ऑक्साइडों का अम्लीय गुण सामान्यतः बढ़ता है, जबकि समूह में ऊपर से नीचे आने पर धात्विक ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है। 4. उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की आयनन एंथैल्पी अपने संबंधित आवर्त में सर्वाधिक होती है, जबकि उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी का मान धनात्मक होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन जोड़ने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव अंतःस्रावी तंत्र में हॉर्मोन्स के नियंत्रण, उनकी रासायनिक प्रकृति और उससे संबंधित विकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अग्नाशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में स्थित अल्फा कोशिकाएं 'ग्लूकागॉन' हॉर्मोन का स्राव करती हैं, जो एक ग्लाइकोजेनोलिसिस और ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करने वाला हाइपरग्लाइसेमिक कारक है। 2. एड्रेनल मेड्यूला द्वारा स्रावित 'एपिनेफ्रीन' (एड्रेनालाईन) और 'नॉरएपिनेफ्रीन' (नॉरएड्रेनालाईन) कैटेकोलामीन हॉर्मोन हैं, जो आपातकालीन परिस्थितियों (लड़ो या भागो प्रतिक्रिया) के दौरान हृदय स्पंदन, श्वसन दर और पुतली के फैलाव को बढ़ाते हैं। 3. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन मुख्य रूप से वृक्क नलिकाओं पर कार्य करके जल के पुनरअवशोषण को नियंत्रित करता है, जबकि 'वैसोप्रेसिन' (ADH) गर्भाशय की पेशियों के संकुचन और दुग्ध निष्कासन को प्रेरित करता है। 4. पीयूष ग्रंथि का अग्र भाग (Adenohypophysis) 'ग्रोथ हॉर्मोन' (GH) का स्राव करता है, जिसकी अत्यधिक कमी से बच्चों में 'बौनापन' (Pituitary dwarfism) होता है और वयस्कता में इसके अतिस्राव से 'एक्रेमेगली' (Acromegaly) नामक विकार उत्पन्न होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? → यांत्रिकी (Mechanics) में कार्य, ऊर्जा और संवेग के संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी वस्तु पर एक संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा कार्य किया जाता है, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस स्थिति में यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है। 2. प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic collision) में कुल गतिज ऊर्जा और कुल रैखिक संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं, जबकि अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic collision) में केवल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है। 3. कोणीय संवेग संरक्षण का नियम इस बात पर आधारित है कि यदि किसी निकाय पर लगने वाला बाह्य बल आघूर्ण (External Torque) शून्य हो, तो निकाय का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है, जैसे कि सूर्य के चारों ओर घूमते हुए ग्रह की कक्षीय गति। 4. अश्वशक्ति (Horsepower) शक्ति की एक व्यावसायिक इकाई है, जहाँ 1 अश्वशक्ति का मान ठीक 746 वाट के बराबर होता है और यह ऊर्जा के परिवर्तन की दर को प्रदर्शित करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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