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General Science
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मागतिकीय चरों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
  2. 2. किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा ($U$) एक अवस्था फलन (State function) है, जिसका अर्थ है कि इसका परिवर्तन पथ पर निर्भर नहीं करता है, जबकि ऊष्मा ($Q$) और कार्य ($W$) पथ फलन (Path functions) हैं जो निकाय द्वारा अपनाए गए प्रक्रम पर निर्भर करते हैं।
  3. 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($Q = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आती है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान की संकल्पना को स्पष्ट करता है और तापीय साम्यावस्था की शर्त बताता है। कथन 2 सही है क्योंकि आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था फलन है जो प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करती है, जबकि ऊष्मा और कार्य पथ फलन होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि रुद्धोष्म संपीड़न (Adiabatic compression) के दौरान जब गैस पर कार्य किया जाता है ($W < 0$), तो ऊर्जा संरक्षित रहने के कारण उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ती है और तापमान में वृद्धि होती है, न कि गिरावट। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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