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General Science
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों की आवर्तिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को विलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' कहलाती है, और आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार घटने के कारण आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः बढ़ती है, तथापि ऑक्सीजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी नाइट्रोजन से कम होती है क्योंकि नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों में अर्ध-पूरित (half-filled) विन्यास का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है।
- 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान फ्लोरिन (-328 kJ/mol) की तुलना में क्लोरीन (-349 kJ/mol) के लिए अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन परमाणु का अत्यंत छोटा आकार होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण उत्पन्न होता है।
- 3. लैंथेनाइड आकुंचन (Lanthanoid contraction) के प्रभावस्वरूप, संक्रमण तत्वों की दूसरी और तीसरी श्रेणियों (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ़िज़ियम) के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसके कारण उनके रासायनिक गुण अत्यधिक भिन्न हो जाते हैं और उन्हें पृथक् करना बहुत आसान हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है, लेकिन नाइट्रोजन ($2s^2 2p^3$) का अर्ध-पूरित विन्यास इसे ऑक्सीजन की तुलना में अधिक स्थायी बनाता है, जिससे नाइट्रोजन की आयनन ऊर्जा अधिक होती है। कथन 2 भी सही है; फ्लोरिन का आकार छोटा होने के कारण इसके $2p$ उपकोश में घनत्व अधिक होता है, जिससे नए आने वाले इलेक्ट्रॉन के प्रतिप्रतिकर्षण के कारण इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन से कम ऋणात्मक होती है। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि लैंथेनाइड आकुंचन के कारण Zr और Hf की त्रिज्याएँ लगभग समान होने से उनके रासायनिक गुण अत्यधिक *समान* हो जाते हैं, जिससे उन्हें पृथक् करना कठिन होता है, न कि आसान। आवर्त सारणी के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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जीवाणुभोजी (Bacteriophage) और आनुवंशिक विकास के संदर्भ में, 'हर्शेल और चेस के प्रयोग' (Hershey-Chase experiment) तथा 'डीएनए प्रतिकृति' (DNA replication) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्शेल और चेस ने अपने प्रयोग में रेडियोएक्टिव सल्फर ($^{35}S$) का उपयोग डीएनए को चिन्हित करने के लिए और रेडियोएक्टिव फॉस्फोरस ($^{32}P$) का उपयोग प्रोटीन आवरण को चिन्हित करने के लिए किया था, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आनुवंशिक पदार्थ प्रोटीन है।
2. मेसेल्सन और स्टाल (Meselson and Stahl) ने एस्चेरिचिया कोलाई ($E. coli$) पर अपने प्रयोग द्वारा यह प्रमाणित किया कि डीएनए की प्रतिकृति 'संरक्षी' (Conservative) प्रकार की होती है, जिसमें मूल डीएनए अणु का दोनों स्ट्रैंड सुरक्षित रहता है और एक नया दोहरा स्ट्रैंड बनता है।
3. डीएनए पोलीमरेज एंजाइम हमेशा $5' \rightarrow 3'$ दिशा में नए स्ट्रैंड के संश्लेषण को उत्प्रेरित करता है, जिसके कारण रज्जुक (Strand) का निर्माण दो रूपों में होता है—एक 'अग्रगामी रज्जुक' (Leading strand) जो सतत रूप से बनता है और दूसरा 'पश्चगामी रज्जुक' (Lagging strand) जो छोटे खंडों (ओकाजाकी खंड) के रूप में असंतत रूप से संश्लेषित होता है।
4. आनुवंशिक कूट (Genetic code) त्रिक (Triplet) प्रकृति का होता है, यानी तीन नाइट्रोजन क्षारकों का एक समूह एक अमीनो अम्ल को कोड करता है, और यह कूट 'अपहृत' (Degenerate) होता है क्योंकि एक से अधिक प्रकूट (Codon) एक ही अमीनो अम्ल के लिए कोड कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रकाश संश्लेषण की 'प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया' (Light Reaction) हरित लवक के स्ट्रोमा में संपन्न होती है, जहाँ जल के प्रकाشی अपघटन (Photolysis) से ऑक्सीजन, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं, जबकि केल्विन चक्र (C3 चक्र) थाइलाकोइड झिल्ली पर होता है।
2. 'जिब्रेलिन' (Gibberellin) एक पादप हॉर्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वसंधि) की लंबाई को बढ़ाकर तने के दीर्घीकरण को प्रेरित करता है तथा बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को तोड़कर अंकुरण में सहायता करता है।
3. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये पौधे मिट्टी में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है जो बीजाणुद्भिद पर आश्रित रहता है।
4. 'एब्सिसिक अम्ल' (ABA) को 'तनाव हॉर्मोन' (Stress Hormone) कहा जाता है, जो प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे जल की कमी के दौरान पर्णरंध्रों (Stomata) को बंद करने और बीज की प्रसुप्ति को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन के अंतर्गत हाइड्रोकार्बन और ईंधनों के रासायनिक गुणों तथा उनके संरचनात्मक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) में सभी कार्बन परमाणु $sp^3$ संकरित होते हैं और ये मुक्त मूलक halogenation (हैलोजनीकरण) अभिक्रियाओं के प्रति उच्च प्रतिक्रियाशीलता दर्शाते हैं, जिसमें प्रकाश की उपस्थिति में श्रृंखला संचरण (Chain propagation) का चरण ऊष्माशोषी होता है।
2. जब एथाइन (एसिटलीन) गैस को लाल तप्त लोहे की नली में 873 K ताप पर प्रवाहित किया जाता है, तो यह चक्रीय बहुलीकरण (Cyclic polymerization) के माध्यम से बेन्जीन का निर्माण करती है, जो ऐरिफ़ेटिक से एरोमैटिक यौगिक में परिवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
3. डीजल इंजनों में ईंधन के स्वतः प्रज्वलन (Auto-ignition) के कारण उत्पन्न होने वाली 'नॉक' या अपस्फोटन (Knocking) की प्रवृत्ति को मापने के लिए 'सीटेन संख्या' (Cetane Number) का उपयोग किया जाता है, जहाँ उच्च सीटेन संख्या बेहतर प्रज्वलन गुणवत्ता को दर्शाती है।
4. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त होने वाले केरोसिन (मिट्टी का तेल) और गैसोलीन (पेट्रोल) में, गैसोलीन की ऑक्टेन संख्या कम होती है जिसके कारण यह डीजल की तुलना में संपीडन अनुपात (Compression ratio) को सहन करने की अत्यधिक क्षमता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त समूहों की आनुवंशिकी और रुधिर आधान (Blood Transfusion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कोडोमिनेंस (सह-प्रभाविता) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ $I^A$ और $I^B$ एलील अपने आप को स्वतंत्र रूप से सह-अभिव्यक्त करते हैं, किंतु ये दोनों एलील अप्रभावी 'i' एलील पर प्रभावी होते हैं।
2. जब किसी 'A' रक्त समूह वाले व्यक्ति को गलती से 'B' रक्त समूह का रक्त चढ़ा दिया जाता है, तो प्राप्तकर्ता के प्लाज्मा में उपस्थित प्राकृतिक 'anti-B' एंटीबॉडी दाता की लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) पर उपस्थित 'B' एंटीजन के साथ मिलकर तीव्र एग्लूटीनेशन (विघटन) प्रतिक्रिया करते हैं।
3. 'Rh-असंगति' (Rh Incompatibility) के कारण होने वाला 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस' (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब होता है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, और इस स्थिति में माँ के शरीर में उत्पन्न होने वाले एंटी-Rh एंटीबॉडी (IgG प्रकार) प्लेसेंटा को पार कर सकते हैं।
4. रुधिर प्लाज्मा में पाए जाने वाले 'anti-A' और 'anti-B' एंटीबॉडी मुख्य रूप से IgG प्रकार के इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो अपनी कम आणविक भार और मोनोमेरिक संरचना के कारण आसानी से प्लेसेंटा की बाधा को पार कर भ्रूण तक पहुँच जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी का जनक किसे माना जाता है?
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