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समांग और विषमांग उत्प्रेरण (Homogeneous and Heterogeneous Catalysis) तथा विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों समान भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरकों की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण (Adsorptive activation) होता है, जो रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम कर देता है।
  2. 2. वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह 'राउल्ट का नियम' केवल आदर्श विलयनों द्वारा ही सभी सांद्रता सीमाओं पर सटीकता से पालन किया जाता है।
  3. 3. कोलॉइडी विलयनों (Colloidal solutions) में प्रक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) के कणों द्वारा आपतित प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले 'टिंडल प्रभाव' (Tyndall effect) को देखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रक्षिप्त कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक हो।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक एक ही प्रावस्था (phase) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरक की सतह पर गैस या द्रव अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण होता है, जिससे अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि राउल्ट का नियम केवल 'तनु' (dilute) आदर्श विलयनों पर ही सटीकता से लागू होता है, सांद्र विलयनों पर यह विचलन प्रदर्शित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि टिंडल प्रभाव प्रदर्शित होने के लिए प्रक्षिप्त प्रावस्था के कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत कम (या उसके लगभग तुलनीय) होना चाहिए, न कि बहुत अधिक। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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