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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा उनके परिष्करण (Refining) की विधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'मोंड प्रक्रम' (Mond process) का उपयोग निकेल धातु के शोधन के लिए किया जाता है, जिसमें अशुद्ध निकेल को कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ गर्म करके एक वाष्पशील यौगिक 'न निकेल टेट्राकार्बोनिड' बनाया जाता है, जिसे बाद में उच्च ताप पर अपघटित करके अत्यंत शुद्ध निकेल प्राप्त किया जाता है।
  2. 2. 'एल्युमिनोथर्मी प्रक्रम' (Alumino-thermic process) में एल्युमिनियम का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है, और जब क्रोमियम या मैंगनीज के ऑक्साइडों को एल्युमिनियम चूर्ण के साथ गर्म किया जाता है, तो यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होती है जिसके परिणामस्वरूप पिघली हुई धातु प्राप्त होती है।
  3. 3. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्क को वायु की सीमित मात्रा में उसके गलनांक से नीचे के ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की विधि है, जबकि 'निस्तापन' (Calcination) कार्बोनेट या हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म करने की प्रक्रिया है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: मोंड प्रक्रम (Mond process) निकेल के शोधन की एक प्रसिद्ध विधि है। इसमें अशुद्ध निकेल को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के साथ लगभग 320-350 K पर गर्म करके वाष्पशील कॉम्प्लेक्स 'निकेल टेट्राकार्बोनिल' बनाया जाता है, जिसे उच्च ताप (लगभग 450 K) पर गर्म करने पर यह शुद्ध निकेल और CO में अपघटित हो जाता है। कथन 2 सही है: एल्युमिनोथर्मी प्रक्रम (Goldchmidt aluminothermic process) में अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु एल्युमिनियम का उपयोग कम प्रतिक्रियाशील धातुओं जैसे क्रोमियम, मैंगनीज और आयरन के ऑक्साइडों को अपचयित करने के लिए किया जाता है। यह अभिक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी होती है। कथन 3 गलत है: भर्जन (Roasting) की प्रक्रिया में सल्फाइड अयस्क को वायु की **अधिकता (सीमित मात्रा नहीं)** में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है ताकि वह ऑक्साइड में परिवर्तित हो सके। सल्फाइड अयस्कों के लिए वायु की पर्याप्त आपूर्ति अनिवार्य होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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