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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राउल्ट के नियम (Raoult's law) के अनुसार, किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलयन में उपस्थित विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के ठीक बराबर होता है।
- 2. 'सजातीय उत्प्रेरण' (Homogeneous catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे कि सभी द्रव या सभी गैस) में होते हैं, जबकि 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, जिसमें अधिकांशतः ठोस उत्प्रेरक और गैसीय अभिकारक प्रयुक्त होते हैं।
- 3. ऋणात्मक उत्प्रेरण (Negative catalysis) के अंतर्गत उत्प्रेरक किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाने के लिए उसकी सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को अत्यधिक बढ़ा देता है, जिससे अभिकारकों के लिए ऊर्जा अवरोध पार करना कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राउल्ट के नियम के अनुसार किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है और वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है। कथन 2 सही है क्योंकि सजातीय उत्प्रेरण में उत्प्रेरक और अभिकारक समान प्रावस्था (Phase) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में वे भिन्न प्रावस्थाओं में होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि 'ऋणात्मक उत्प्रेरक' रासायनिक अभिक्रिया के वेग को **घटाते** हैं, और ऐसा वे सक्रियण ऊर्जा को **बढ़ाकर** करते हैं जिससे ऊर्जा अवरोध अधिक हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनावृतबीजी (Gymnosperms) पौधों में बीज नग्न होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय भित्ति पूर्णतः अनुपस्थित होती है, और इनका भ्रूणपोष (Endosperm) निषेचन से पहले बनने के कारण अगुणित (n) प्रकृति का होता है।
2. केल्विन चक्र (C3 चक्र) में कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक ग्राही एक 5-कार्बन यौगिक 'रिबुलोस 1,5-बिफॉसफेस' (RuBP) होता है, और यह अभिक्रिया 'रुबिस्को' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है, जो पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला एंजाइम है।
3. साइटोकिनीन (Cytokinin) पादप हॉर्मोन मुख्य रूप से जड़ों के अग्रभाग पर संश्लेषित होता है और यह कोशिका विभाजन को प्रेरित करने के साथ-साथ 'जीर्णता' (Senescence) की प्रक्रिया को विलंब करने में सहायता करता है।
4. प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रकाश-स्वतंत्र अभिक्रिया (Dark reaction या केल्विन चक्र) सीधे तौर पर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति पर निर्भर करती है और यह पौधे की हरित लवक की थाइलाकोइड झिल्ली में घटित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरएच कारक (Rh factor), जो कि एक एरिथ्रोसाइट झिल्ली पर स्थित एंटीजन है, की अनुपस्थिति (Rh negative) वाले व्यक्ति में Rh positive रक्त के पहली बार संपर्क में आने पर तुरंत गंभीर आधान प्रतिक्रिया (Hemolytic transfusion reaction) होती है क्योंकि शरीर में पहले से ही प्राकृतिक रूप से Rh एंटीबॉडी मौजूद होते हैं।
2. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-negative गर्भवती महिला दूसरी बार Rh-positive भ्रूण को गर्भ में धारण करती है, जिससे माँ के शरीर में बने एंटी-Rh IgG एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार करके भ्रूण के लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट करने लगते हैं।
3. 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' ($O_h$ फेनोटाइप) वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H' एंटीजन अनुपस्थित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे A, B, AB, O) से रक्त प्राप्त नहीं कर सकते और उन्हें केवल दूसरे बॉम्बे रक्त समूह से ही रक्त लेना पड़ता है।
4. रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन (Thromboplastin) और कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में प्रोथ्रोम्बिन का सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरण होता है, जो अंततः घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन जाल में बदलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गोलीय दर्पणों और लेंसों से संबंधित प्रकाशकीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण (Concave mirror) के वक्रता केंद्र (Centre of curvature) पर रखा जाता है, तो बनने वाली वास्तविक और उल्टे प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बिल्कुल बराबर होता है, और इस स्थिति में दर्पण की रेखीय आवर्धन क्षमता (Linear magnification) का मान -1 होता है।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब पानी (अपवर्तनांक = 1.33) में डुबोया जाता है, तो हवा की तुलना में इसका अपवर्तनांक कम हो जाने के कारण इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है और इसकी अभिसारी (Converging) क्षमता कमजोर हो जाती है।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है और आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए, जबकि अपवर्तन कोण हमेशा 90 डिग्री से अधिक होता है।
4. वाहनों में पश्च-दृश्य (Rear-view) दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह हमेशा वस्तु का सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे चालकों को पीछे के एक विस्तृत क्षेत्र का स्पष्ट दृश्य प्राप्त होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत-चुंबकीय तरंगों को माध्यम चाहिए?
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तरलों के सामान्य गुणों (जैसे पृष्ठ तनाव और श्यानता) तथा आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की बूंद का गोलीय आकार न्यूनतम पृष्ठ ऊर्जा बनाए रखने की प्रवृत्ति के कारण होता है, और यदि किसी द्रव में अशुद्धि मिलाई जाए तो उसका पृष्ठ तनाव सदैव बढ़ जाता है।
2. तापमान में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घटती है, जबकि गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, जिसका केंद्र हटाए गए तरल का द्रव्यमान केंद्र होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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