BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
1 views

आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आवर्तिता और आयनिक विभव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है।
  2. 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (फ्लोरीन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता जाता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता अपने समूह में सबसे अधिक होती है।
  3. 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच देखा जाता है, क्योंकि इनके ध्रुवणात्मक गुण (Polarizing power) और आयनिक आकार लगभग समान होते हैं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर आयनन ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन नाइट्रोजन ($1s^2 2s^2 2p^3$) का $2p$ कक्षक अर्ध-पूरित होने के कारण अधिक स्थायी होता है, जिससे इससे इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन हो जाता है और इसकी आयनन ऊर्जा ऑक्सीजन से अधिक होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि छोटे आकार के कारण फ्लोरीन पर इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित बल अधिक होता है, जिससे इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम होता है; अतः हैलोजन में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता सबसे अधिक ऋणात्मक होती है। कथन 3 सही है क्योंकि द्वितीय और तृतीय आवर्त के विकर्ण रूप से आमने-सामने के तत्वों में चार्ज-टू-रेडियस अनुपात समान होने के कारण रासायनिक गुणों में समानता पाई जाती है, जिसे विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार विकर्ण संबंध कहा जाता है।
Share:

Related Questions

रेगिस्तानी ओक? एक्स-रे (X-ray) कैसी तरंग है? प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस की तरह व्यवहार करने के स्थान पर अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति कार्य करने लगता है। 2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $f = R/2$ केवल तब पूरी तरह सत्य होता है जब आपतित किरणें मुख्य अक्ष के अत्यधिक निकट होती हैं (जिन्हें परैक्सियल किरणें या Paraxial rays कहा जाता है)। 3. जब प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य और चाल दोनों घट जाती हैं, किंतु उसकी आवृत्ति (Frequency) अपरिवर्तित रहती है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाए तथा आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से कम होना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथ घटकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक तार का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है, और अधिकांश धात्विक चालकों के लिए तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) का प्रतिरोध तापमान में वृद्धि के साथ घटता है। 2. किचहोफ का प्रथम नियम (धारा नियम) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जबकि द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम) आवेश संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है। 3. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के योग से अधिक होता है। 4. किसी सेल का टर्मिनल विभवांतर (Terminal Potential Difference) उसके आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) के कारण, सेल से धारा लिए जाने की स्थिति में उसके विद्युत वाहक बल (EMF) से कम होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? द्रवों के प्रवाह और उनके सामान्य गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी नली में बहने वाले आदर्श द्रव के लिए, बर्लेमी का प्रमेय (Bernoulli's Theorem) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार धाराखीय प्रवाह में द्रव के किसी भी बिंदु पर दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का कुल योग नियत रहता है। 2. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) किसी द्रव का वह गुण है जिसके कारण द्रव का मुक्त पृष्ठ न्यूनतम क्षेत्रफल घेरने का प्रयास करता है, और जल में थोड़े से सर्पिल या डिटर्जेंट मिलाने पर उसका पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है, जिससे कपड़ों के मैल आसानी से साफ हो जाते हैं। 3. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह आंतरिक गुण है जो उनकी परतों के बीच होने वाले आपेक्षिक गति का विरोध करता है, तथा ताप में वृद्धि होने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है जबकि गैसों की श्यानता ताप बढ़ने के साथ बढ़ जाती है। 4. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावक बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावक बल वस्तु के गुरुत्व केंद्र (Center of gravity) पर कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.