त्वरित लिंक्स
General Science
1 views
विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) की रासायनिक गतिकी तथा ऊष्मागतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हेनरी का नियम (Henry's law) यह बताता है कि किसी तरल में गैस की विलेयता उस गैस के आंशिक दाब के व्युत्क्रमानुपाती होती है, बशर्ते तापमान स्थिर रहे और गैस तरल के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया न करे।
- 2. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) के 'अधिष्ोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का भौतिक या रासायनिक अधिशोषक होना अभिक्रिया वेग को बढ़ाता है क्योंकि इससे सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) का मान कम हो जाता है।
- 3. विशिष्ट उत्प्रेरक विष (Catalytic poison) वे पदार्थ होते हैं जो किसी उत्प्रेरक की सतह पर दृढ़ता से अधिशोषित होकर उसकी सक्रियता को पूरी तरह से समाप्त या कम कर देते हैं, जिससे उत्प्रेरकीय अभिक्रिया अवरुद्ध हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि हेनरी के नियम के अनुसार, किसी तरल में गैस की विलेयता (Mole fraction of gas in solution) तरल के ऊपर विकिपीडिया संदर्भ गैस के आंशिक दाब के समानुपाती (directly proportional) होती है, न कि व्युत्क्रमानुपाती। कथन 2 सत्य है; विषमांगी उत्प्रेरण में अभिकारकों के अणु उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित होते हैं, जिससे पुरानी बंधनों को तोड़ने और नए बंधनों को बनाने के लिए आवश्यक सक्रियण ऊर्जा घट जाती है। कथन 3 सत्य है; उत्प्रेरक विष (जैसे हैबर प्रक्रम में आयरन उत्प्रेरक के लिए $H_2S$ या कार्बन मोनोऑक्साइड) उत्प्रेरक की सतह पर सक्रिय स्थलों को अवरुद्ध करके उसकी दक्षता को नष्ट कर देते हैं।
Related Questions
→
ब्यूटेन का सूत्र?
→
रासायनिक बंधन और अम्लीय-क्षारीय गुणों (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा अष्टक-अपूर्ण यौगिक (जैसे $BF_3$) उत्कृष्ट लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
2. जब किसी दुर्बल अम्ल के लवण को उसके प्रबल क्षार के साथ जल में घोला जाता है, तो जल-अपघटन (Hydrolysis) के फलस्वरूप प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है और विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है।
3. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार भी उतना ही प्रबल होता है।
4. जल के स्व-आयनन (Self-ionization) के कारण, शुद्ध जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान बढ़ाने पर $K_w$ का मान बढ़ने से शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह रासायनिक रूप से उदासीन ही रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
व्यतिकरण (Interference)?
→
विद्युत परिपथों और चालकों के प्रतिरोध (Resistance) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार की लंबाई को यदि दोगुना कर दिया जाए और उसकी त्रिज्या को भी दोगुना कर दिया जाए, तो उसका विद्युत प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का आधा हो जाता है।
2. अर्द्धचालकों (Semiconductors) की विद्युत चालकता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है, क्योंकि ताप बढ़ने पर अधिक सहसंयोजक बंध टूटते हैं और मुक्त इलेक्ट्रॉनों तथा होलों की संख्या में वृद्धि होती है, जिसके कारण उनका प्रतिरोध ताप गुणांक (Temperature coefficient of resistance) ऋणात्मक होता है।
3. जब प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो तुल्य प्रतिरोध परिपथ के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से कम होता है, और कुल धारा का मान बढ़ जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Organelles) और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सिसोम' (F0-F1 कण) ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के दौरान एटीपी (ATP) के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं, और माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र से जुड़े एंजाइम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं।
2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का 'सिस्टर्नी' (Cisternae) नेटवर्क ध्रुवीय रूप से व्यवस्थित होता है, जिसमें 'सिस' (Cis) सिरा निर्माणकारी (Forming) या अभिमुखी सिरा होता है जो अंतःद्रव्य जालिका (ER) की ओर होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) सिरा परिपक्व (Maturing) सिरा होता है।
3. लाइसोसोम में उपस्थित 'हाइड्रोलिटिक एंजाइम' (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज, कार्बोहाइड्रेज) अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अनुकूलित pH को बनाए रखने के लिए लाइसोसोम झिल्ली पर सक्रिय प्रोटॉन पंप ($H^+$ ATPase) कार्य करते हैं।
4. परऑक्सिसोम (Peroxisomes) एकहरे झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं जो पादपों और जंतुओं दोनों में पाए जाते हैं, और इनमें उपस्थित 'कैटालेज' एंजाइम हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) को जल और ऑक्सीजन में विघटित करके कोशिकाओं को विषैले प्रभावों से बचाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.