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General Science
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आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आयनिक त्रिज्या और संक्रमण धातुओं की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी समइलेक्ट्रॉनिक प्रजाति (Isoelectronic species) के समूह में, जैसे $O^{2-}, F^-, Na^+, Mg^{2+}$ और $Al^{3+}$, नाभिकीय आवेश (Nuclear charge) बढ़ने के साथ आयनिक त्रिज्या लगातार घटती जाती है।
  2. 2. d-ब्लॉक के तत्वों की 'द्वितीय संक्रमण श्रेणी' (4d श्रेणी) के तत्वों की परमाणु त्रिज्या अपने से ठीक ऊपर स्थित 'प्रथम संक्रमण श्रेणी' (3d श्रेणी) के तत्वों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक होती है, क्योंकि नीचे जाने पर मुख्य क्वांटम संख्या (Principal quantum number) में वृद्धि होती है।
  3. 3. संक्रमण धातुएँ और उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय (Paramagnetic) प्रकृति के होते हैं, जिसका मुख्य कारण उनके d-कक्षकों में अयुग्मित (Unpaired) इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि समइलेक्ट्रॉनिक प्रजातियों (जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है) में प्रोटॉनों (नाभिकीय आवेश) की संख्या बढ़ने पर प्रभावी आकर्षण बल बढ़ता है, जिससे आयनिक त्रिज्या घट जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide contraction) के प्रभाव के कारण d-ब्लॉक की 4d और 5d श्रेणियों के तत्वों के आकार 3d श्रेणी के तत्वों के लगभग बराबर हो जाते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि संक्रमण धातुओं के आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण वे चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं, जिसे विकिपीडिया संदर्भ अनुचुम्बकत्व कहा जाता है।
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Related Questions

आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में क्षारीय धातुओं (alkali metals) से हैलोजन की ओर बढ़ने पर, परमाणुओं की इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity) का मान सामान्यतः अधिक ऋणात्मक होता जाता है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन का जुड़ना अधिक ऊर्जाक्षेपी (exothermic) हो जाता है। 2. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide contraction) के कारण, 4d और 5d श्रेणी की संक्रमण धातुओं (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ्नियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिससे उनके रासायनिक गुणों में अत्यधिक समानता देखने को मिलती है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal relationship) मुख्य रूप से दूसरे और तीसरे आवर्त के तत्वों (जैसे लीथियम और मैग्नीशियम) के बीच प्रदर्शित होता है, जिसका कारण आयनिक त्रिज्या और आवेश-से-त्रिज्या अनुपात (Charge-to-size ratio) का लगभग समान होना है। 4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionisation Enthalpy) का मान उनके आवर्त में न्यूनतम होता है, क्योंकि उनके अष्टक (Octet) पूर्ण होने के कारण वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागने के लिए प्रवृत्त होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रונים को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करती है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (Fluorine) की इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron affinity) अपने समूह के अन्य सभी तत्वों जैसे क्लोरीन की तुलना में सबसे अधिक ऋणात्मक होती है। 3. आयनन विभव (Ionization Potential) का मान किसी परमाणु की गैसीय अवस्था से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को दर्शाता है, और यह सामान्यतः क्षारीय मृदा धातुओं (Group 2) में समान आवर्त की क्षार धातुओं (Group 1) की तुलना में अधिक होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में काफी बड़ी होती है। 2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है। 3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित 2p कक्षकीय इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण बहुत कम होता है। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का आवरण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ऊर्जा का मात्रक क्या है? सौर सेल सामग्री?
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