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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संक्षारण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'गैल्वेनीकरण' (Galvanizing) लोहे या इस्पात को जंग से बचाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उस पर पिघली हुई जस्ते (Zinc) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है, और इस प्रक्रिया में जस्ता 'बलिदान एनोड' (Sacrificial anode) के रूप में कार्य करता है क्योंकि जस्ते का मानक ऑप्शन विभव (Reduction potential) लोहे की तुलना में अधिक ऋणात्मक होता है।
- 2. 'एक्वा रेजिया' (Royal Water) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को भी घोल सकता है, क्योंकि यह मिश्रण अपने भीतर शक्तिशाली ऑक्सीकारकों जैसे 'क्लोरीन गैस' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' का निर्माण करता है।
- 3. सफेद फास्फोरस ($P_4$) एक अत्यंत प्रतिक्रियाशील और विषैला अधातु है जो अंधेरे में चमकता है (स्फुरदीप्ति या Chemiluminescence), और इसे हवा में स्वतः प्रज्वलित होने से रोकने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है, जबकि लाल फास्फोरस इससे कम प्रतिक्रियाशील, पॉलीमेरिक संरचना वाला और जल में अघुलनशील होता है।
- 4. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'कास्टनर-कैलनर सेल' (Castner-Kellner cell) या विद्युत अपघटनी प्रक्रिया में, नमकीन घोल (Brine) के विद्युत अपघटन के दौरान एनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, जबकि सोडियम धातु पारे (Mercury) के साथ मिलकर अमलगम का निर्माण करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। गैल्वेनीकरण में जस्ता (Zn) लोहे की तुलना में अधिक क्रियाशील होने के कारण 'बलिदान एनोड' की तरह कार्य करता है और लोहे को ऑक्सीकरण से बचाता है। एक्वा रेजिया में सांद्र $HCl$ और सांद्र $HNO_3$ का 3:1 अनुपात होता है जो सोना और प्लैटिनम जैसी नोबल धातुओं को गलाने में सक्षम है, जैसा कि विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत रूप से वर्णित है। सफेद फास्फोरस अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होता है और हवा में स्वतः आग पकड़ लेता है, अतः इसे जल में रखा जाता है। इसके अतिरिक्त, कास्टनर-कैलनर विधि द्वारा क्लोर-क्षार प्रक्रिया में ब्राइन के विद्युत अपघटन से एनोड पर क्लोरीन और कैथोड पर सोडियम-पारा अमलगम का निर्माण होता है।
Related Questions
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण के तरीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षय रोग (Tuberculosis) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, जबकि 'डॉट्स' (DOTS) प्रणाली इसके उपचार के लिए अपनाई जाने वाली प्रत्यक्ष अवलोकन उपचार रणनीति है।
2. जापानी एन्सेफलाइटिस एक विषाणु जनित मस्तिष्क का संक्रमण है, जिसका संचरण मुख्य रूप से 'क्युलेक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और इसके विषाणु के लिए सुअर तथा पक्षी प्राथमिक पोषक (Reservoir hosts) के रूप में कार्य करते हैं।
3. रिलैप्सिंग फीवर और टाइफस ज्वर जैसे संक्रामक रोग जीवाणुओं (जैसे बोरेलिया और रिकेट्सिया) के कारण होते हैं, जिनका संचरण टिक (Ticks), जूँ (Lice) और पिùओं (Fleas) जैसे आर्थ्रोपोड वैक्टर द्वारा होता है।
4. हेपेटाइटिस बी एक डीएनए विषाणु है जो मुख्य रूप से दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है, तथा इसके संक्रमण से आंतों की उपकला कोशिकाओं का गंभीर क्षय और यकृत सिरोसिस (Liver Cirrhosis) उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुपरकंडक्टर की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
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चुम्बकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति ($X$) का मान ताप पर निर्भर करता है; क्यूरी-वाइस नियम के अनुसार, अनुचुम्बकीय (Paramagnetic) पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति निरपेक्ष ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है, बशर्ते तापमान क्यूरी ताप से अधिक हो।
2. प्रतिचुम्बकीय (Diamagnetic) पदार्थों में चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान ऋणात्मक और ताप पर लगभग स्वतंत्र होता है, और जब इन्हें बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये क्षेत्र के विपरीत दिशा में दुर्बल रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।
3. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण उस कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग चुम्बकीय ब्रेकिंग (Magnetic braking) तथा प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी तकनीकों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और लसिका तंत्र (Lymphatic System) की क्रियात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय का 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) एक गतिप्रेरक (Pacemaker) के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वतः क्रियाविभव (Action potential) उत्पन्न करने की उच्चतम क्षमता रखता है, जिससे हृदय की पेशियों का संकुचन नियंत्रित होता है।
2. जब रक्त कोशिकाओं से केशिकाओं (Capillaries) के माध्यम से ऊतकों में प्रवाहित होता है, तो हाइड्रोस्टेटिक दबाव के कारण प्लाज्मा का एक बड़ा भाग प्रोटीन सहित कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय अवकाश में छन जाता है, जिसे लसिका कहा जाता है।
3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्सियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन, सक्रिय थ्रॉम्बिन में परिवर्तित होता है, जो आगे घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बदल देता है।
4. फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery) शरीर की एकमात्र धमनी है जो ऑक्सीजनित (Oxygenated) रक्त का वहन करती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा विऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों से बाएं आलिंद तक पहुँचाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र और हॉर्मोन्स के नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एड्रिनल ग्रंथि का वल्कुट (Adrenal cortex) 'एल्डोस्टेरोन' (Aldosterone) मिनरलोकॉर्टिकोइड का स्राव करता है, जो मुख्य रूप से वृक्क नलिकाओं पर कार्य करके सोडियम आयनों और जल के पुनरअवशोषण को बढ़ाता है तथा पोटेशियम एवं हाइड्रोजन आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
2. पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपरकैल्सेमिक हॉर्मोन है, जो रक्त में कैल्सियम के स्तर को बढ़ाने के लिए अस्थियों के पुनरावशोषण (Bone resorption) को उत्तेजित करता है और वृक्कों द्वारा कैल्सियम के पुनरअवशोषण को कम करता है।
3. थायराइड ग्रंथि की फॉलिक्युलर कोशिकाएं 'थायरोक्सिन' ($T_4$) और 'ट्रायोआयोडोथायरोनिन' ($T_3$) का संश्लेषण करती हैं, जिनके निर्माण के लिए टायरोसिन अमीनो अम्ल और आयोडीन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
4. पीयूष ग्रंथि का पश्च भाग (Neurohypophysis) स्वयं किसी हॉर्मोन का संश्लेषण नहीं करता है, बल्कि यह हाइपोथैलेमस द्वारा उत्पादित 'वैसोप्रेसिन' (ADH) और 'ऑक्सीटोसिन' को संचयित कर रक्त में विमोचित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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