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General Science
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ऊष्मा और ऊष्मागतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth law of thermodynamics) 'ताप की अवधारणा' को परिभाषित करता है, जिसके अनुसार यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य (Thermal equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
  2. 2. समदाबी प्रक्रम (Isobaric process) में निकाय को दी गई संपूर्ण ऊष्मा का उपयोग केवल आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन करने में होता है, क्योंकि इस प्रक्रम में किया गया कार्य सदैव शून्य होता है।
  3. 3. 'स्टीफन-बोल्ट्ज़मैन नियम' (Stefan-Boltzmann law) के अनुसार, किसी आदर्श कृष्णिका (Blackbody) द्वारा प्रति एकांक क्षेत्रफल से उत्सर्जित कुल विकिरण ऊर्जा उसके निरपेक्ष तापमान की चतुर्थ घात ($T^4$) के सीधे आनुपातिक होती है।
  4. 4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है, जिसके कारण इस प्रक्रम में गैस के संपीडन पर उसकी आंतरिक ऊर्जा और तापमान दोनों में वृद्धि होती है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम तापमान की अवधारणा को वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि समदाबी (Isobaric) प्रक्रम में दाब स्थिर रहता है, न कि आयतन; इस प्रक्रम में किया गया कार्य शून्य नहीं होता (कार्य $W = P\Delta V$ होता है)। आयतन स्थिर रहने पर होने वाले प्रक्रम (समायतनिक या Isochoric process) में किया गया कार्य शून्य होता है और दी गई संपूर्ण ऊष्मा आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन करती है। कथन 3 सही है, स्टीफन-बोल्ट्ज़मैन नियम के अनुसार $E = \sigma T^4$ होता है। कथन 4 सही है, रुद्धोष्म प्रक्रम में $Q = 0$ होता है और संपीडन से आंतरिक ऊर्जा बढ़ने के कारण तापमान बढ़ता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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