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General Science
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सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं के भीतर विभिन्न कोशिका अंगकों (Organelles) की संरचना, उनके अंतःझिल्ली तंत्र और प्रोटीन लक्ष्यीकरण (Protein targeting) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) से संश्लेषित होने वाले स्रावी प्रोटीन और झिल्ली प्रोटीन मुख्य रूप से खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (RER) की सतह पर स्थित राइबोसोम द्वारा बनाए जाते हैं, और इन प्रोटीनों के N-टर्मिनस पर एक विशेष 'सिग्नल पेप्टाइड' होता है जिसे साइटोसॉल में उपस्थित 'सिग्नल रिकॉग्निशन पार्टिकल' (SRP) पहचानता है।
- 2. लाइसोसोम (Lysosome) पाचक एंजाइमों (हाइड्रोलेसेस) से भरे होते हैं जो अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सर्वाधिक सक्रिय होते हैं, और लाइसोसोमल झिल्ली पर मौजूद प्रोटॉन पंप ($V$-type ATPases) एटीपी के जल-अपघटन का उपयोग करके साइटोसॉल से ल्यूमेन में हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) को सक्रिय रूप से पंप करते हैं।
- 3. परॉक्सिसोम (Peroxisome) एक झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगक है जो माइटोकॉन्ड्रिया की तरह अर्ध-स्वायत्त होता है, क्योंकि इसमें अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए और 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं, जिसके माध्यम से यह अपने सभी आवश्यक प्रोटीनों का स्व-संश्леषण करता है।
- 4. गोल्जीकाय (Golgi apparatus) के 'ट्रांस-गोल्जी नेटवर्क' (TGN) से निकलने वाले नए लाइसोसोमीय प्रोटीनों पर 'मैनोज-6-फॉस्फेट' (M6P) टैग जुड़ जाता है, जिसे ट्रांस-गोल्जी झिल्ली पर स्थित M6P रिसेप्टर्सपहचानकर उन्हें क्लोथ्रिन-कोटेड वेसिकल्स के माध्यम से पूर्व-लाइसोसोम डिपो की ओर निर्देशित करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि RER पर संश्लेषित होने वाले प्रोटीनों के N-टर्मिनस पर 'सिग्नल पेप्टाइड' होता है, जिसे 'सिग्नल रिकॉग्निशन पार्टिकल' (SRP) पहचानकर राइबोसोम-mRNA कॉम्प्लेक्स को ER झिल्ली पर निर्देशित करता है। कथन 2 सही है क्योंकि लाइसोसोम के भीतर अम्लीय वातावरण बनाए रखने के लिए $V$-प्रकार के प्रोटॉन पंप $H^+$ आयनों को अंदर पंप करते हैं जिससे अम्लीय हाइड्रोलेसेस सक्रिय रहते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि परॉक्सिसोम (Peroxisome) एक अर्ध-स्वायत्त अंगक **नहीं** है; इनमें माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट की तरह अपना स्वयं का डीएनए या राइबोसोम नहीं होते हैं, बल्कि इनके सभी प्रोटीन साइटोसॉल में मुक्त राइबोसोम द्वारा संश्लेषित होकर बाद में अंगक के अंदर आयात किए जाते हैं। कथन 4 सही है क्योंकि लाइसोसोम में जाने वाले एंजाइमों को गोल्जीकाय में मैनोज-6-फॉस्फेट (M6P) समूह से चिह्नित किया जाता है। कोशिका अंगकों की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वस्तु को देखने के लिए प्रकाश का क्या आवश्यक है?
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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत गति करते हुए किसी ग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिससे ग्रह सूर्य के निकट होने पर अधिक तीव्र गति से चलता है।
2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है और उसे अनंत तक भेजने के लिए बाह्य ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
3. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है, और यह उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में परिक्रमण करता है।
4. किसी उपग्रह के अंदर स्थित अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण (गुरुत्वीय त्वरण) से मुक्त पतन की स्थिति में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्काइन्स (Alkynes) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनका सामान्य सूत्र $C_n H_{2n-2}$ होता है, और इनमें कार्बन-कार्बन परमाणुओं के मध्य कम से कम एक त्रिक बंध (Triple bond) पाया जाता है, जो इन्हें एल्कीन्स की तुलना में अधिक अम्लीय प्रकृति प्रदान करता है।
2. 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) पेट्रोल की प्रज्वलन गुणवत्ता का माप है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन (जैसे आइसो-ऑक्टेन, मान 100) नॉकिंग (अपस्फोटन) का अधिक प्रतिरोध करते हैं, जबकि निम्न ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन (जैसे एन-हेप्टेन, मान 0) शीघ्रता से अपस्फोटन उत्पन्न करते हैं।
3. उत्प्रेरकी रिफॉर्मिंग (Catalytic Reforming) प्रक्रिया के दौरान, निम्न ऑक्टेन वाले नैप्था और पैराफिन हाइड्रोकार्बनों को प्लेटिनम जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में एरोमैटिक हाइड्रोकार्बनों (जैसे बेंजीन और टुप्युलीन) में परिवर्तित किया जाता है ताकि गैसोलीन की गुणवत्ता सुधारी जा सके।
4. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से मीथेन और एथेन का एक उच्च संपीड़ित मिश्रण है, जिसे घरेलू ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, और रिसाव का तुरंत पता लगाने के लिए इसमें गंधयुक्त पदार्थ एथिल मर्कैप्टेन मिलाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया में अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक से कम तापमान पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सल्फाइड अयस्कों को उनके संगत ऑक्साइडों में परिवर्तित करना और वाष्पशील अशुद्धियों को दूर करना है।
2. ऐलुमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult Process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर उसका विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक के रूप में कार्य करते हुए मिश्रण के गलनांक को कम करता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाता है।
3. 'सफेद सीसा' (White Lead) लेड कार्बोनेट और लेड हाइड्रॉक्साइड का एक मिश्रण होता है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से पेंट पिगमेंट के रूप में किया जाता है, किंतु हाइड्रोजन सल्फाइड गैस के संपर्क में आने पर यह काला पड़ जाता है।
4. जब तांबे (Copper) के निष्कर्षण के दौरान 'मैट' (Matte) को बेसीमर परिवर्तक (Bessemer converter) में गर्म किया जाता है, तो प्राप्त होने वाला फफोलेदार तांबा (Blister Copper) लगभग 99% शुद्ध होता है और इसमें सल्फर डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले फंस जाने के कारण फफोले जैसी संरचना बन जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की झिल्ली पर ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के एंटीजन (एग्लूटिनोजन) उपस्थित होते हैं, जबकि प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से विशिष्ट एंटीबॉडी (एग्लूटिनिन) पाए जाते हैं, और कार्ल लैंडस्टीनर ने एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी की उपस्थिति के आधार पर ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Phenotype) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है, क्योंकि इनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दे तो सकते हैं परंतु केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
3. Rh कारक का आनुवंशिक संचरण मुख्य रूप से एक बहु-युग्मविक (Multiple allele) प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है, और Rh-धनात्मक रक्त को Rh-ऋणात्मक व्यक्ति में पहली बार चढ़ाने पर प्लाज्मा में तीव्र गति से एंटी-D एंटीबॉडी का निर्माण होता है, जिससे तत्काल गंभीर हीमोलिटिक आधान प्रतिक्रिया (Hemolytic transfusion reaction) होती है।
4. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता का गर्भ Rh-धनात्मक भ्रूण से युक्त होता है, जिसमें प्रथम संतान सामान्य जन्म लेती है किंतु प्रसव के दौरान भ्रूण के Rh-धनात्मक एरिथ्रोसाइट्स माता के परिसंचरण में प्रवेश करके प्राथमिक प्रतिरक्षा अनुक्रिया को प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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