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General Science
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डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत (Natural Selection) और आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत (Modern Synthetic Theory of Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत इस बात पर केंद्रित था कि व्यक्तिगत जीवों में होने वाले कायिक (Somatic) उत्परिवर्तन पीढ़ियों के दौरान संचयी रूप से वंशागत होते हैं, जो स्पीचिएशन (Speciation) का मुख्य कारण बनते हैं।
  2. 2. आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत (Neo-Darwinism) के अनुसार, विकास की मूल इकाई 'व्यक्तिगत जीव' नहीं बल्कि 'समष्टि' (Population) है, और समष्टि की जीन आवृतियों में होने वाले परिवर्तन ही जैव विकास का आधार हैं।
  3. 3. 'जेनेटिक ड्रिफ्ट' (Genetic Drift) या आनुवंशिक अपवाह एक यादृच्छिक (Random) प्रक्रिया है जो छोटी समष्टियों में अधिक प्रभावी होती है और यह प्राकृतिक चयन के विपरीत, कभी-कभी लाभकारी एलील को भी समष्टि से पूर्णतः विलुप्त कर सकती है।
  4. 4. अनुकूलित विकिरण (Adaptive Radiation) एक ही पूर्वज से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में नई जातियों के उद्भव की प्रक्रिया है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण डार्विन की फिंच (Darwin's Finches) और ऑस्ट्रेलियन मार्सुपियल हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि डार्विन और उनके समकालीन वैज्ञानिकों को आनुवंशिकी की सही जानकारी नहीं थी, और बाद में अगस्त वीजमैन ने सिद्ध किया कि केवल जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होने वाले परिवर्तन ही वंशागत होते हैं, कायिक (Somatic) परिवर्तन नहीं। इसके अलावा, उत्परिवर्तन की अवधारणा बाद में जोड़ी गई थी। कथन 2 सत्य है, आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत के अनुसार समष्टि (Population) ही विकास की इकाई है। कथन 3 सत्य है, जेनेटिक ड्रिफ्ट एक यादृच्छिक घटना है जो छोटी आबादी में एलील आवृत्तियों को प्रभावित करती है। कथन 4 सत्य है, एडाप्टिव रेडिएशन एक ही पूर्वज से विभिन्न जातियों के विकास को दर्शाता है। जैव विकास की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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